छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएँ एवं कानून बनाए गए हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में घटित घटनाओं ने एक बार फिर महिला सुरक्षा तंत्र की कमजोरी को उजागर कर दिया है।
थाना सिटी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बुडगहन नाला में आज एक अज्ञात महिला शव मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस जांच में जुटी है, किंतु प्रारंभिक रूप से शव महिला का प्रतीत हो रहा है। यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि महिलाएँ अब भी कितनी असुरक्षित हैं।
वहीं ग्राम चरोटी में 26 वर्षीय युवती तेजस्विनी पटेल की निर्मम हत्या और जले हुए शव की बरामदगी ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। जांच में आरोपी सालिक राम पैकरा को गिरफ्तार किया गया, जो साइकोपैथ प्रवृत्ति का है और सोशल मीडिया पर 19 फर्जी महिला अकाउंट बनाकर महिलाओं को झांसा देने में लिप्त था। आरोपी ने युवती को मिलने के लिए मजबूर किया, और मना करने पर चाकू व लकड़ी से हत्या कर शव जला दिया।
लोक लाज और सामाजिक भय के कारण अनेक महिलाएँ अब भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से बचती हैं, जिससे ऐसे अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है।
सरकार की “सखी वन स्टॉप सेंटर”, “181 हेल्पलाइन”, “महिला थाना” जैसी योजनाएँ तभी सार्थक होंगी जब इनका वास्तविक क्रियान्वयन हो और पीड़िताओं को तत्काल न्याय मिले।
बलौदा बाजार की ये घटनाएँ समाज के लिए चेतावनी हैं —
“सिर्फ कानून नहीं, अब ज़रूरत है साहस, जागरूकता और संवेदनशील प्रणाली की।”