जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने न्याय व्यवस्था को गति देने के साथ हजारों लोगों को त्वरित राहत पहुंचाई। तालुका न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय स्तर तक आयोजित इस विशेष पहल में कबीरधाम जिले में कुल 31,734 प्रकरणों का निराकरण किया गया और 10,77,03,433 रुपये से अधिक की राशि के मामलों का समाधान हुआ। एक ही दिन में इतने बड़े पैमाने पर प्रकरणों का निपटारा जिले की न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
जिले में इस बार कुल 11 खंडपीठों का गठन किया गया था। इनमें से 10 खंडपीठ जिला मुख्यालय कबीरधाम में और 1 खंडपीठ व्यवहार न्यायालय पंडरिया में संचालित की गई। इन खंडपीठों में दाण्डिक राजीनामा योग्य प्रकरण, चेक बाउंस के मामले, व्यवहार वाद, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, वैवाहिक विवाद, बैंक लोन, बिजली बिल, दूरभाष बिल और जलकर से जुड़े प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया।
मोटर दुर्घटना और राजस्व मामलों में बड़ी राहत
खंडपीठ क्रमांक 01 में मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों में 28,60,000 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई। वहीं राजस्व न्यायालय में लंबित 22,589 प्रकरणों का निराकरण कर 10,38,17,286 रुपये की राशि से संबंधित मामलों का समाधान किया गया। यह आंकड़ा बताता है कि लंबे समय से लंबित राजस्व विवादों को एक ही मंच पर सुलझाने का प्रभावी प्रयास किया गया।
विद्युत प्रकरणों में 2,78,997 रुपये की वसूली करते हुए मामलों का निराकरण किया गया। नगर पालिका द्वारा जलकर और अन्य करों से जुड़े 184 प्रकरणों में 1,20,107 रुपये की वसूली की गई। परिवार न्यायालय में 25 वैवाहिक प्रकरणों का निराकरण कर 1,35,900 रुपये से संबंधित मामलों का समाधान हुआ।
वैवाहिक विवादों में समझौता, टूटते रिश्तों को मिला सहारा
नेशनल लोक अदालत केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई परिवारों के जीवन में नई शुरुआत का माध्यम बनी। परिवार न्यायालय में एक ऐसा मामला सामने आया, जहां पति की शराब की लत के कारण पत्नी और दो बच्चे अलग रहने को मजबूर हो गए थे। पति अपनी आय का अधिकांश हिस्सा शराब में खर्च कर देता था, जिससे परिवार का भविष्य संकट में था। मामला न्यायालय पहुंचा, लेकिन लोक अदालत में समझाइश और परामर्श के बाद दंपत्ति ने पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। बिखर चुका परिवार फिर से एक हो गया।
एक अन्य मामले में वर्ष 2025 में विवाह के महज 20-25 दिन बाद ही पति-पत्नी के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था और दोनों अलग रहने लगे थे। मामला परिवार न्यायालय में पहुंचा। लोक अदालत के दौरान परामर्श और संवाद की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके बाद दोनों ने आपसी मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने की सहमति दी। इस तरह नवदंपत्ति को नया जीवन मिला।
न्यायालय परिसर में दिखा उत्सव जैसा माहौल
लोक अदालत को जन-अभियान का रूप देने के लिए न्यायालय परिसर में सेल्फी प्वाइंट बनाया गया था, जहां पक्षकारों ने समझौते की खुशी को तस्वीरों में कैद किया। साथ ही स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर आने वाले पक्षकारों को स्वास्थ्य लाभ भी दिया गया। इससे आयोजन केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ा दिखाई दिया।





