नियमों की अनदेखी, प्रशासन खामोश — कहीं भी हो सकती है बड़ी अनहोनी
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। जिन एंबुलेंस गाड़ियों को मरीजों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, वे ही अब लोगों की जान पर बन आई हैं। जिले में बड़ी संख्या में पुराने वेन और इको जैसे निजी उपयोग वाले वाहन को मामूली रंग-रोगन व स्टीकर लगाकर एंबुलेंस का रूप दे दिया गया है। ये गाड़ियां न तो संचालन मानकों पर खरी उतरती हैं और न ही इनमें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
सड़कों पर मौत की सवारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के ही संचालित हो रही हैं। इन वाहनों में जीवन रक्षक उपकरणों की भारी कमी है, और कुछ में ऑक्सीजन सिलेंडर तक नहीं हैं। कई गाड़ियों में तो अंदर स्ट्रेचर तक की व्यवस्था नहीं है, जिससे गंभीर मरीजों को बैठाकर या किसी असुरक्षित अवस्था में लाना-ले जाना पड़ रहा है।
एम्बुलेंस संचालन के नियमों की खुली अवहेलना
स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक एंबुलेंस संचालन के लिए मेडिकल फिटनेस, प्रशिक्षित चालक, पैरामेडिकल स्टाफ, स्ट्रेचर, ऑक्सीजन, जीवन रक्षक दवाएं और जीपीएस सिस्टम जैसी बुनियादी आवश्यकताएं जरूरी होती हैं। लेकिन कबीरधाम जिले में चल रही इन तथाकथित एंबुलेंसों में से अधिकतर किसी भी मानक पर खरी नहीं उतरतीं।
प्रशासन मौन,
सवाल यह उठता है कि जब हर वाहन का पंजीयन, फिटनेस और स्वास्थ्य विभाग से अनुमोदन अनिवार्य है, तो फिर ये अनफिट गाड़ियां एंबुलेंस बनकर कैसे सड़कों पर दौड़ रही हैं? स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस पूरी व्यवस्था में संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही सामने आ रही है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश वर्मा कहते हैं, “जिन गाड़ियों में मरीजों को सुरक्षित पहुंचाया जाना चाहिए, वहीं गाड़ियां कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं। ये मरीजों के लिए नहीं, मौत की चलती हुई गाड़ियां हैं।” नागरिकों ने मांग की है कि तत्काल इन सभी गाड़ियों का तकनीकी परीक्षण कराया जाए और जो भी वाहन नियमों के विरुद्ध संचालित हो रहे हैं, उन्हें जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
विभाग की भूमिका पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एंबुलेंस संचालन की निगरानी परिवहन विभाग करता है, जबकि परिवहन विभाग का कहना है कि लाइसेंस और फिटनेस के आधार पर ही वाहन चलने की अनुमति दी जाती है। ऐसे में दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बचते नजर आ रहे हैं।
कबीरधाम जिले में एंबुलेंस सेवा के नाम पर हो रही यह लापरवाही न सिर्फ नियमों की अवहेलना है, बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी से खुला खिलवाड़ भी है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी दिन एक छोटी सी चूक किसी बड़ी जनहानि में बदल सकती है।