बिलाईगढ़ और कसडोल विधानसभा के अंतिम छोर स्थित बारनवापारा क्षेत्र गुड़गढ़ , भिभोरी ,नवाडीह सहित अन्य गांव में कदम रखते ही साफ महसूस होता है कि देश भले अमृत काल मना रहा हो और छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष, लेकिन यहां के करीब 20 से 22 गांव अभी भी विकास से कोसों दूर हैं।
गांव के रास्तों पर चलते हुए ग्रामीणों से बात करने पर सबसे पहला शब्द जो बार-बार सुनाई देता है—“बिजली कब आएगी ।
आजादी के सात दशक बाद भी यहां अंधेरा कायम है।
“आवेदन भी दिया, निवेदन भी… लेकिन बदलता कुछ नहीं”
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली सहित बुनियादी सुविधाओं के लिए वे वर्षों से आवेदन, निवेदन और ज्ञापन देते आ रहे हैं। लेकिन हालात जस के तस हैं।
ग्राम के बुजुर्ग बेदराम बरिहा कहते हैं
“साहब, बचपन से सुनते आए कि जल्द बिजली लगेगी… लेकिन आज भी रात में हाथ आगे करो तो दिखता नहीं। क्या यही विकास है”
युवा गोलू ठाकुर बताते हैं—
“हम यहां से पढ़ाई करके आगे बढ़ना चाहते हैं, पर स्कूल और सड़क की हालत देखिए… कई बार अधिकारी आए, फोटो खिंचवाए और चले गए।”
गांवों की एक ही पुकार—‘अबकी बार समाधान चाहिए’
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने शासन-प्रशासन को अनगिनत बार पत्र लिखे, नयी-पुरानी सरकारों से गुहार लगाई, पर 20 से अधिक गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं।
रामचरण यादव कहते हैं—
“हम लोग विनती करते-करते थक गए हैं। सरकार रजत जयंती मना रही है और हम आज भी लालटेन पर जी रहे हैं।”
तेंदूपत्ता, वनाधिकार और रोजगार—ये भी बड़ी समस्याएं
ग्रामीणों ने चर्चा के दौरान बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण में अनियमितताएँ, सामुदायिक वन अधिकार पत्र का लंबा इंतजार और रोजगार के साधनों की कमी ने जीवन और कठिन बना दिया है।
अनिरूद्ध दीवान कहते हैं—
“यहां जंगल है, संसाधन हैं, लेकिन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। वनाधिकार पत्र अभी तक पूरा नहीं हुआ।”
ग्रामीणों की आवाज उठाने वालों में
पुरुषोत्तम प्रधान, अमर ध्वज यादव, माधव तिवारी, भूपेंद्र बारिक, सम्पत ठाकुर, संजीव कुमार, संतोष ठाकुर, अवन टंडन, कुमार जगत, हेमु दीवान, भीखम ठाकुर, लक्ष्मीनारायण ठाकुर, गोवर्धन ओंटी, परमेश्वर जगत, जहरू राम, कलपराम, भुवन यादव, ब्रिज कुमार, डिग्री प्रधान, उमाशंकर, प्रवीण कुमार, सुन्दर, पंचराम, खेमराज ठाकुर सहित कई ग्राम प्रमुख और सैकड़ों ग्रामीण शामिल है ।