छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा बलौदा बाजार जिले में महानदी पर निर्मित किए जा रहे लाटा एनीकट का निर्माण कार्य अब गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक सवालों के घेरे में आ गया है। 34 करोड़ 87 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत वाली यह परियोजना न केवल निर्धारित समयसीमा से पिछड़ रही है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी बड़े प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी अनुसार जून 2026 तक की समयसीमा, अब तक सिर्फ 40% कार्य
जानकारी के अनुसार एनीकट निर्माण कार्य पिछले सत्र में प्रारंभ किया गया था। कुल 30 माह (वर्षा ऋतु सहित) की निर्धारित अवधि में से अधिकांश समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक केवल लगभग 40 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है। ऐसे में जून 2026 तक कार्य पूर्ण होना संदेह के घेरे में है।
नागरिक सूचना पटल अधूरा, नियमों का उल्लंघन
निर्माण स्थल पर लगाए गए नागरिक सूचना पटल में कार्य प्रारंभ तिथि का उल्लेख तक नहीं किया गया है, जो शासकीय निर्माण नियमों के अनुसार अनिवार्य है। यह लापरवाही परियोजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाती है और पारदर्शिता के अभाव को दर्शाती है।
पानी में खड़ा स्ट्रक्चर, फाउंडेशन की मजबूती पर खतरा
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि निर्माणाधीन एनीकट स्ट्रक्चर में पानी भरा हुआ है, और उसी अवस्था में निर्माण कार्य जारी है। जल संसाधन विभाग के तकनीकी मानकों एवं IS कोड के अनुसार एनीकट निर्माण के दौरान ड्राई कंडीशन में फाउंडेशन और कंक्रीट कार्य किया जाना आवश्यक होता है। पानी में किया गया कार्य भविष्य में सीपेज, क्रैक और स्ट्रक्चरल फेल्योर का कारण बन सकता है।
महानदी की रेत का उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल
सूत्रों के अनुसार निर्माण में महानदी के बहाव क्षेत्र से प्राप्त रेत का उपयोग किया जा रहा है। बिना वैज्ञानिक धुलाई, ग्रेडिंग और लैब परीक्षण के नदी रेत का प्रयोग तकनीकी मानकों के विपरीत माना जाता है, जिससे एनीकट की दीर्घकालिक मजबूती पर असर पड़ सकता है।
परियोजना की तकनीकी जानकारी
कार्य का नाम: महानदी पर लाटा एनीकट निर्माण
जिला: बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़
लागत: ₹34.87 करोड़
क्रियान्वयन एजेंसी: सुनील कुमार अग्रवाल, ‘A’ क्लास ठेकेदार, रायगढ़
आकार:
लंबाई – 7200 मीटर
चौड़ाई – 40 मीटर
ऊंचाई – 3.0 मीटर
कार्य अवधि: 30 माह (वर्षा ऋतु सहित)
जल सुरक्षा से जुड़ा मामला
लाटा एनीकट परियोजना बलौदा बाजार जिले की भूजल रिचार्ज और ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता हुआ, तो इसका सीधा नुकसान आने वाले वर्षों में किसानों और ग्रामीण आबादी को उठाना पड़ेगा।
अब जरूरी है जवाबदेही
क्या समय पर परियोजना पूरी हो पाएगी?
क्या विभागीय इंजीनियरों द्वारा नियमित तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है?
क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई गई है?
अब यह मामला केवल एक निर्माण परियोजना का नहीं, बल्कि बलौदा बाजार जिले में करोड़ों की जनधनराशि और जल सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। शासन स्तर पर उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और जवाबदेही तय किए जाने की मांग तेज हो रही है।