ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े मुद्दों को लेकर मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कवर्धा जिले के डोमसरा गाँव में मनरेगा कार्यस्थल पर जन चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मजदूरों और ग्रामीणों ने भाग लेकर अपनी समस्याएँ खुलकर रखीं।
जन चौपाल में नवीन जायसवाल, अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी कवर्धा, गौतम शर्मा (प्रभारी – मनरेगा बचाओ अभियान), दिनेश कोसरिया एवं जनपद सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। उपस्थित नेताओं ने मनरेगा मजदूरों से सीधा संवाद कर रोजगार, मजदूरी भुगतान और कार्य दिवसों में कटौती जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
मनरेगा को कमजोर करने का आरोप
नेताओं ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण गरीबों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि जीवन यापन की गारंटी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों और नीतिगत बदलावों से मनरेगा को कमजोर किया जा रहा है।
काम के दिनों में कटौती और मजदूरी भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण मजदूरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
लंबित मजदूरी तत्काल देने की मांग
जन चौपाल में मजदूरों ने बताया कि कई परिवारों की मजदूरी महीनों से लंबित है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। इस पर नेताओं ने मांग की कि सभी लंबित मजदूरी का तत्काल भुगतान किया जाए और मनरेगा के तहत पूरे 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारों के प्रति जागरूकता
कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को मनरेगा के अधिकारों, जैसे—
समय पर रोजगार उपलब्ध कराने का अधिकार
15 दिन में मजदूरी भुगतान
काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता
के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
अभियान को तेज करने का संकल्प
जन चौपाल के अंत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मनरेगा बचाओ अभियान को और तेज करने तथा गांव-गांव जाकर मजदूरों को संगठित करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट रहा—
ग्रामीण मजदूरों की आवाज को मजबूती देना, मनरेगा को कमजोर करने वाली नीतियों का विरोध करना और रोजगार के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना।