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भोरमदेव महोत्सव में ‘कार्ड वाले वीआईपी’ नदारद! नाम छपा, पर अतिथि नहीं आए – सहमति ली गई थी या सिर्फ दिखावा”

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मैकल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच आयोजित 30वें भोरमदेव महोत्सव में जहां एक ओर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्यता देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर आयोजन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। महोत्सव के आमंत्रण पत्र में उपमुख्यमंत्री, विधायक, सांसद सहित कई बड़े जनप्रतिनिधियों के नाम प्रमुखता से छापे गए, लेकिन कार्यक्रम के दिन ये “मुख्य चेहरे” पूरी तरह नदारद रहे।

आमंत्रण पत्र में जिन अतिथियों को मुख्य अतिथि, अध्यक्षता और विशिष्ट अतिथि के रूप में दर्शाया गया था, उनकी अनुपस्थिति ने आयोजकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। स्थानीय लोगों और उपस्थित जनप्रतिनिधियों के बीच यह चर्चा जोरों पर रही कि आखिर जिनका नाम इतनी प्रमुखता से छापा गया, वे कार्यक्रम में क्यों नहीं पहुंचे।

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इन अतिथियों से कार्यक्रम में आने की पूर्व सहमति ली गई थी, या फिर केवल कार्यक्रम को “भव्य” दिखाने के लिए उनके नाम कार्ड में जोड़ दिए गए। यदि सहमति ली गई थी, तो फिर अंतिम समय में अनुपस्थित रहने के पीछे क्या कारण रहे और यदि सहमति नहीं ली गई थी, तो यह सीधे-सीधे प्रोटोकॉल और गरिमा का उल्लंघन माना जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस बात को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि इस तरह बिना पुष्टि के बड़े नेताओं के नाम छापना न केवल आयोजन की साख को कमजोर करता है, बल्कि संबंधित पदों की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।

हालांकि कार्यक्रम में स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी शानदार रहीं, लेकिन “कार्ड में छपे और मंच से गायब” अतिथियों की चर्चा पूरे महोत्सव पर भारी पड़ती नजर आई।

भोरमदेव महोत्सव की संस्कृति संध्या में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक और शास्त्रीय परंपराओं का मनोहारी प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम में गीत, संगीत और नृत्य की विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। सुप्रसिद्ध जसगीत एवं लोकगायक दिलीप षडंगी ने अपने भक्ति गीतों और लोकधुनों से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। उनके “हर हर भोला…” जैसे गीतों पर दर्शक भावविभोर हो उठे।

वहीं लोकप्रिय लोकगायिका आरु साहू ने अपने सुमधुर गीतों से महोत्सव को छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया। उनके प्रस्तुति के दौरान दर्शक झूमते नजर आए। इसके अलावा बैगा जनजाति का पारंपरिक नृत्य, छात्राओं की नृत्य-नाटिका, कत्थक और भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।

स्थानीय एवं बाहरी कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से महोत्सव परिसर तालियों की गूंज से गूंजता रहा और पूरी रात संस्कृति, आस्था और उत्साह का अद्भुत माहौल बना रहा।

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