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अल्ट्रा टेक की ‘गोद’ में बदहाली! दलदल में गिरती छात्राएं, सकलोर की बेटियां पहुंचीं कलेक्ट्रेट

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बलौदाबाजार
जिले में अल्ट्रा टेक सीमेंट संयंत्र के गोद लिए गांव सकलोर में विकास की बजाय उपेक्षा की तस्वीरें सामने आ रही हैं। खराब सड़कों और बस सुविधा के अभाव से परेशान छात्राएं आखिरकार स्कूल की बजाय कलेक्ट्रेट पहुंच गईं, ताकि अपनी आवाज़ सरकार और कंपनी दोनों तक पहुंचा सकें।

स्कूल नहीं, शिकायत लेकर पहुंचीं कलेक्ट्रेट
बुधवार को सकलोर की छात्राएं हाथों में ज्ञापन लिए जब बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट पहुंचीं, तो यह दृश्य चौंकाने वाला था। ये लड़कियां किसी सामान्य भ्रमण या प्रतियोगिता के लिए नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा, सुविधा और भविष्य को लेकर लड़ने आई थीं।
उन्होंने कहा—”हम रोज कीचड़ में गिरकर स्कूल जाते हैं, अब पढ़ाई नहीं, पहले इंसान की तरह जीने का हक चाहिए।”
‘गोद ग्राम’ में सड़क और बस दोनों गायब
अल्ट्रा टेक सीमेंट ने सकलोर को वर्षों पहले ‘गोद ग्राम’ घोषित किया था। सी एस आर के तहत कंपनी को यहां मूलभूत सुविधाएं—सड़क, परिवहन, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा—प्रदान करनी चाहिए थी।
लेकिन सच्चाई यह है कि:
हिरमी से सकलोर की महज 3 किलोमीटर की सड़क पूरी तरह दलदल में बदल चुकी है।
भारी ट्रकों की आवाजाही ने सड़क को और जर्जर कर दिया है।
बच्चों के लिए स्कूल तक जाने कोई बस नहीं, वे कीचड़ में फिसलते हुए पहुंचते है।
. छात्राओं का सवाल
छात्राओं ने तर्क दिया—”कंपनी के ट्रक जब हाई अलर्ट में, गार्ड और सायरन के साथ निकल सकते हैं, तो हम बच्चियां पैदल क्यों फिसलें?”
एक छात्रा ने सवाल उठाया—”क्या हम वी आई पी नहीं । क्या हमारी जान की कोई कीमत नहीं ।
यह सवाल न सिर्फ कंपनी पर, बल्कि सरकारी तंत्र पर भी सवालिया निशान है।
. कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,
लड़कियों ने बलौदाबाजार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उसमें दो प्रमुख मांगें थीं हिरमी-सकलोर मार्ग की तुरंत मरम्मत की जाए। स्कूली छात्राओं के लिए सुरक्षित बस सेवा शुरू की जाए।
ज्ञापन में यह चेतावनी भी दी गई कि यदि जल्द कार्यवाही नहीं हुई, तो छात्राएं एवं ग्रामीण संयंत्र गेट तक धरना-प्रदर्शन करेंगे।
नियमों को लेकर सवाल
सी एस आर एक्ट के अनुसार, किसी भी औद्योगिक इकाई को अपने कार्यक्षेत्र में सामाजिक और बुनियादी विकास करना होता है। लेकिन अल्ट्रा टेक सीमेंट केवल कागजों में सकलोर को गोद लिए बैठी है।
न कोई ट्रैकिंग, न कोई प्रोजेक्ट अपडेट—सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। छात्राएं और ग्रामीण पूछ रहे हैं—”क्या प्रशासन को बच्चों के घायल होने या जान जाने का इंतजार है?”
स्थानीय लोग मानते हैं कि प्रशासन और कंपनी की चुप्पी—दोनों मिलीभगत या लापरवाही का संकेत हैं।
. यह अकेले सकलोर की नहीं, हर जर्जर गांव की कहानी
सकलोर केवल एक उदाहरण है। छत्तीसगढ़ समेत देशभर में कई गांव ऐसे हैं, जिन्हें उद्योगों ने “विकास” का सपना दिखाकर “धूल” और “अंधकार” सौंपा है।
आज जरूरत है कि सी एस आर केवल मुनाफे की मार्केटिंग नहीं, बल्कि ज़मीनी ज़िम्मेदारी भी बने।
अल्ट्रा टेक सीमेंट और जिला प्रशासन दोनों को अब जवाब देना होगा।
क्या विकास का मतलब केवल ट्रकों की आवाज और उत्पादन की गिनती है।
या फिर गांव की बेटियों की सुरक्षा, सुविधा और शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है ।

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