कवर्धा। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले दूसरे राज्यों से धान की आवक पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। राज्य में प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की व्यवस्था के बीच बाहरी धान की आवक को लेकर सतर्कता जरूरी हो गई है। यदि समय रहते परिवहन और खरीदी केंद्रों की निगरानी नहीं की गई, तो बाहरी धान को स्थानीय किसानों के नाम पर खपाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
धान खरीदी सरकार की महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसका लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके बावजूद खरीदी शुरू होने से पहले सीमावर्ती रास्तों से बड़ी मात्रा में धान आने की सूचनाओं की जांच नहीं होना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर सकता है। सीमाओं पर जांच की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से बिचौलियों को अनुचित लाभ उठाने का अवसर मिल सकता है।
प्रशासन को राजस्व, खाद्य, मंडी और पुलिस विभाग के समन्वय से सीमावर्ती मार्गों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए। संदिग्ध वाहनों के परिवहन दस्तावेज, धान का स्रोत, मात्रा और गंतव्य की जांच की जानी चाहिए। खरीदी केंद्रों पर किसान पंजीयन, रकबे, निर्धारित पात्रता, तौल पर्ची और स्टॉक का मिलान भी अनिवार्य रूप से कराया जाना चाहिए।
पिछले वर्षों में धान खरीदी के दौरान सामने आई अनियमितताओं के अनुभवों को देखते हुए इस बार पहले से रोकथाम की कार्रवाई जरूरी है। केवल खरीदी केंद्रों पर जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परिवहन से लेकर भंडारण तक निगरानी करनी होगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
किसानों के हक पर सेंधमारी रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। बाहरी धान की आवक संबंधी सूचनाओं की तत्काल जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो फर्जी खरीदी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता और इसका नुकसान वास्तविक किसानों के हितों तथा सरकारी व्यवस्था को उठाना पड़ सकता है।