कबीरधाम जिले के बोडला विकासखंड अंतर्गत ग्राम लालपुर कला में कथित झोलाछाप चिकित्सा के मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई संदेह के घेरे में आ गई है। दस्तावेजों के अनुसार 17 जून 2026 को शिकायतकर्ता रामेश्वर ठाकुर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि परसराम साहू द्वारा बिना वैध चिकित्सकीय पंजीयन एवं क्लीनिक संचालन अनुमति के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
शिकायत में उल्लेख है कि 16 जून को तबीयत बिगड़ने पर शिकायतकर्ता को परसराम साहू के पास ले जाया गया, जहां ब्लड प्रेशर एवं शुगर जांच करने के बाद ड्रिप, इंजेक्शन और दवाइयां दी गईं तथा 350 रुपये नकद लिए गए। आरोप है कि उपचार के बाद उनकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल सहित अन्य चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा 23 जून 2026 को पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति को सात दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जांच के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
1 जुलाई 2026 के एक लिखित बयान में एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. दिनेश कुमार (पंजीयन क्रमांक CGMC 12805/2022) ने यह उल्लेख किया कि वे ग्राम लालपुर कला में मरीजों का प्राथमिक उपचार करते हैं तथा परसराम साहू उनके सहयोगी के रूप में कार्य करते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि परसराम साहू किसी मरीज से कोई शुल्क नहीं लेते। इसके आधार पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत का निराकरण दर्ज कर दिया गया।
हालांकि शिकायतकर्ता एवं ग्रामीणों का आरोप है कि यदि गांव में नियमित रूप से एमबीबीएस चिकित्सक द्वारा उपचार किया जा रहा था तो क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट अधिनियम 2010 एवं संबंधित नियमों के तहत क्लिनिक का पंजीयन, चिकित्सक की उपस्थिति, नाम पट्टिका, दवा वितरण की अनुमति तथा अन्य वैधानिक दस्तावेज मौके पर प्रदर्शित क्यों नहीं थे।
शिकायतकर्ता के बयान के अनुसार उपचार के दौरान न तो किसी चिकित्सक का पंजीयन प्रदर्शित था और न ही किसी प्रकार की वैध चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध कराई गई।
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जिस मामले में बिना पंजीयन चिकित्सा, इंजेक्शन लगाने और मरीज की जान जोखिम में डालने जैसे गंभीर आरोप लगे थे, उसमें स्वास्थ्य विभाग ने भौतिक सत्यापन, दस्तावेजी परीक्षण और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के बजाय केवल एक बयान के आधार पर शिकायत का निराकरण क्यों कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम से यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप चिकित्सा के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय संबंधित व्यक्तियों को बचाने की कोशिश तो नहीं कर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध चिकित्सा पर रोक लगाने के सरकारी दावों के बीच लालपुर कला का यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मामले में निष्पक्ष पुनः जांच होती है या फिर पूरा प्रकरण फाइलों में दबकर रह जाएगा।
शिकायत कर्ता द्वारा दस्तावेज के अनुसार न्यूज बनाया गया है। चिकित्सक के बयान आना बाकी है।उसे अलग से जारी किया जाएगा