विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर परंपरागत वनौषधि प्रशिक्षित वैद्य संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वैद्य झुमुक लाल मेरावी ने सभी नागरिकों, वैद्यगणों एवं समाजसेवियों से अपील की है कि वे अपने घर, आंगन, खेतों की मेड़ और सार्वजनिक स्थलों पर अधिक से अधिक औषधीय पौधों का रोपण करें।
उन्होंने कहा कि वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण पारंपरिक और दुर्लभ जड़ी-बूटियां तेजी से विलुप्त हो रही हैं। ऐसे में यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि इन बहुमूल्य प्राकृतिक धरोहरों को बचाया जाए। वैद्य मेरावी ने विशेष रूप से “मुलैठी”, “गिलोय”, “अश्वगंधा”, “कालमेघ”, “नीम”, “तुलसी” जैसे बहुपयोगी हर्बल पौधों को लगाने की सलाह दी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समय रहते औषधीय पौधों का संरक्षण नहीं किया गया, तो यह भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है। आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धति पर निर्भर करोड़ों लोगों की सेहत पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वैद्य संघ द्वारा सभी जिलों में हर्बल गार्डन की स्थापना हेतु जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वैद्य मेरावी ने यह भी बताया कि इस दिशा में कार्य करने वाले स्थानीय वैद्यों को संगठन पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।