जिले में प्रशासनिक लापरवाही पर आखिरकार सख्त रुख अपनाया गया है। बिना पूर्व सूचना और सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय से अनुपस्थित रहने पर जनपद पंचायत कवर्धा और जनपद पंचायत बोड़ला के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को सीईओ जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने कारण बताओ सूचना जारी कर दी है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत की गई है।
जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि 14 अप्रैल को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश पूर्व से जारी थे। इतने महत्वपूर्ण दिन पर बिना अनुमति मुख्यालय से अनुपस्थित रहना पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और कदाचार माना गया है। दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्या सख्ती केवल दो जनपद सीईओ तक सीमित रहेगी । जिले की जमीनी हकीकत यह है कि करीब 90 प्रतिशत पंचायत सचिव नियमित रूप से मुख्यालय से नदारद रहते हैं। कई ग्राम पंचायतों में सचिवालय तो नाममात्र के लिए खुलता है। ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी अक्सर अनुपस्थित मिलते हैं।
ग्राम सभा जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों के दिन भी कई पंचायतों में सचिवों की गैरहाजिरी चर्चा का विषय रही। विकास कार्यों की निगरानी, योजनाओं का क्रियान्वयन और वित्तीय पारदर्शिता—इन सबकी जिम्मेदारी जिस तंत्र पर है, वही तंत्र यदि मुख्यालय से गायब रहे तो जवाबदेही किससे तय होगी।
प्रशासन की इस शुरुआती सख्ती को सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पंचायत सचिवों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी या मामला कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा। यदि व्यापक जांच और अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह कार्रवाई भी केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
जिले के ग्रामीणों को इंतजार है कि प्रशासन का यह कड़ा रुख नीचे तक पहुंचे और पंचायत स्तर पर व्याप्त लापरवाही पर भी वैसी ही गाज गिरे, जैसी जनपद स्तर पर गिरी है।