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किसानों का उबाल, हाईवे पर डेरा… 30 करोड़ बकाया और खाद संकट पर सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा

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कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगा है। लंबे समय से बकाया भुगतान, खाद-यूरिया की भारी किल्लत और खेती के लिए जरूरी संसाधनों की कमी से परेशान किसानों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। भारतीय किसान संघ भारतीय किसान संघ और समृद्ध किसान संघ समृद्ध किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने चार सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

किसानों ने नेशनल हाईवे 130 पर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना के सामने तंबू गाड़कर बीच सड़क पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह धरना केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि किसानों की उस पीड़ा का प्रतीक बन गया है जिसे लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा था।

धरना स्थल पर पहुंचे किसानों के चेहरों पर नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी। कई किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे और प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। ट्रैक्टर रैली निकालने की तैयारी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। हाईवे पर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और हर किसी की नजर इस आंदोलन पर टिकी हुई है।

किसानों का आरोप है कि शक्कर कारखाना गन्ना किसानों के साथ खुली नाइंसाफी कर रहा है। किसानों का कहना है कि कारखाने पर उनका 30 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है, लेकिन भुगतान के नाम पर सिर्फ टालमटोल किया जा रहा है। जिन किसानों ने मेहनत, पसीना और कर्ज लेकर गन्ने की फसल तैयार की, आज वही किसान अपने ही पैसे के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसानों के खून-पसीने की कमाई कब तक फाइलों में दबाकर रखी जाएगी।

सिर्फ भुगतान का मुद्दा ही नहीं, जिले में खाद और यूरिया की भयावह कमी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खरीफ सीजन शुरू हो चुका है, बुआई का समय निकलता जा रहा है, लेकिन किसान खाद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। कई समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है, तो जहां है वहां लंबी कतारें लग रही हैं। किसान आरोप लगा रहे हैं कि जिम्मेदार विभाग स्थिति को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।

किसानों की एक और बड़ी मांग है कि उन्हें योजना के तहत 15,000 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ दिया जाए ताकि गन्ना उत्पादन आर्थिक रूप से टिकाऊ बन सके। किसानों का कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है—डीजल महंगा, मजदूरी महंगी, खाद महंगी, बीज महंगा—लेकिन फसल का उचित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसी स्थिति में खेती करना दिन-ब-दिन घाटे का सौदा बनता जा रहा है।

उन्नत बीजों की समय पर उपलब्धता को लेकर भी किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि हर साल बीज वितरण को लेकर अव्यवस्था सामने आती है। जब बुआई का सही समय होता है, तब बीज उपलब्ध नहीं रहते और जब बीज पहुंचते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। यह लापरवाही सीधे उत्पादन पर असर डालती है और नुकसान अंततः किसान को उठाना पड़ता है।

धरना स्थल से किसानों ने सरकार को दो टूक संदेश दिया है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे और सड़क से हटने वाले नहीं हैं।

यह आंदोलन सरकार और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। जिस किसान के दम पर अर्थव्यवस्था और बाजार चलते हैं, वही किसान आज अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठा है। यदि समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल कवर्धा में हालात यही बता रहे हैं कि किसानों का गुस्सा अब शांत होने वाला नहीं, और प्रशासन की चुप्पी आग में घी डालने का काम कर रही है।

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