पंडरिया जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत सोनपुरी के अंतर्गत धुतपुर गाँव में स्थित मैकल पर्वत की गोद में सतनामी समाज द्वारा गुरु अमरदास जी की स्मृति में वार्षिक मेले का चौथा सफल आयोजन 11 मई 2025 को सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में क्षेत्रीय विधायक भावना बोहरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
गुरु अमरदास जी, बाबा गुरु घासीदास जी के सुपुत्र थे। उनका विवाह प्रतापपुर की अंगारमती जी से हुआ था, जिनकी स्मृति में प्रतापपुर में मेला आयोजित किया जाता है। गुरु अमरदास जी ने अपने जीवन में गुरु घासीदास जी के सतनाम मार्ग का अनुकरण करते हुए संयम, एकता और सदाचार से परिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी।
धुतपुर मेला स्थल, जो पंडरिया से लगभग 4 किलोमीटर दूर वन व निजी भूमि क्षेत्र में स्थित है, वहाँ पहुँचने के लिए पगडंडी मार्ग से जाना होता है। सतनामी समाज इस स्थल के विकास हेतु निरंतर प्रयासरत है। बीते वर्षों में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से मंच व सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया है। वर्तमान में 12 लाख रुपये की लागत से नवीन मंगल भवन निर्माण की स्वीकृति मिली है, जो विधायक भावना बोहरा की अनुशंसा से संभव हो पाया।
इस वर्ष मेले में आयोजित सभा में विधायक बोहरा ने समाज को आह्वान किया कि सतनाम संदेश केवल मंच तक सीमित न रहे, बल्कि उसे जीवन में आत्मसात किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि धुतपुर स्थल को “मिनी गिरौदपुरी जैतघाम” के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे यह स्थान सतनाम मार्ग के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त केंद्र बन सके।
सभा में जिला पंचायत प्रतिनिधि महेंद्र धृतलहरे, सेतगंगा से जिला सदस्य रजनी मानिक सोनवानी सहित अनेक वक्ताओं ने गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि जाति, वर्ग और आडंबर से ऊपर उठकर सभी को एक समान दृष्टि से देखने का संदेश आज भी समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में नगरपालिका अध्यक्ष मंजुला कुर्रे, जनपद अध्यक्ष नंदनी साहू, सरपंच दीपक देवी सोनवानी, विजय धृतलहरे, नगर अध्यक्ष भागवत डाहिरे, वरिष्ठ समाजसेवी सुंदर पात्रे, श्याम टंडन, सेवा समिति अध्यक्ष देव धृतलहरे सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
पंडित शिवकुमार तिवारी के सतनाम भजनों ने समूचे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सतनामी समाज, नागरिक व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि जब समाज एकजुट होकर अपने आध्यात्मिक मूल्यों की ओर लौटता है, तब विकास और आत्मिक उन्नति दोनों ही संभव हो पाती हैं।