गुरु पूर्णिमा का पर्व पांडातराई नगर में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति भावना के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर नगर के प्राचीन राम मंदिर में सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी प्रवक्ता, अनंत श्री विभूषित पीठाधीश्वर परम पूज्य आचार्य श्री जलेश्वर महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों ने गुरुदेव के चरणों में नमन कर चरण पादुका पूजन किया। इस दौरान आचार्य श्री जलेश्वर महाराज ने प्रवचन में कहा कि गुरु केवल ज्ञान नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुंचने का माध्यम होता है। उन्होंने कहा, “गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष, गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष।”
उन्होंने बताया कि गुरु जीवन के अंधकार को दूर कर व्यक्ति को आत्मज्ञान और मोक्ष के मार्ग पर ले जाते हैं। गुरु के बिना जीवन अधूरा है। गुरु पूर्णिमा का दिन परम कल्याणकारी होता है और यह आत्मशुद्धि का माध्यम है।
कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई, जिसमें महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर भाग लिया। भजन-कीर्तन, जयकारे, रंग-गुलाल, आतिशबाजी और भक्तिमय वातावरण के बीच नगरवासियों की सैकड़ों की संख्या में सहभागिता रही। आयोजन के अंत में महाआरती कर प्रसादी एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस कार्यक्रम ने एक बार फिर गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को प्रकट किया और नगरवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का सशक्त संचार किया।