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“स्व. श्री दुरौरीना चंद्राकर की स्मृति में भंडारा: शिव मंदिर में खीर-पूड़ी और रसगुल्ले का दिव्य प्रसाद वितरण, आस्था से सराबोर हुआ नवापारा ग्राम”

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पंडरिया
श्रावण मास के पावन तीसरे सोमवार को कुंडा के पास ग्राम नवापारा स्थित शिव मंदिर परिसर भक्ति, सेवा और आस्था की त्रिवेणी में डूबा रहा। यहां स्व. श्रीमती दुरौरीना चंद्राकर की स्मृति में परंपरागत रूप से इस वर्ष भी भव्य खीर-पूड़ी व रसगुल्ले के प्रसाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि सुरज चंद्राकर ने अपनी बहन स्व. दुरौरीना चंद्राकर के नाम से न केवल भंडारा आयोजित किया, बल्कि इसी भावना से गांव में शिव मंदिर का निर्माण भी करवाया था। स्थानीय जनों ने बताया कि धार्मिक आयोजनों में युवा वर्ग की सक्रिय भूमिका village के सामुदायिक जीवन में नया संचार कर रही है।

सुबह विधिवत पूजा-अर्चना के साथ आयोजन की शुरुआत हुई और जैसे-जैसे दिन चढ़ा, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और युवा सभी ने भगवान शिव के दिव्य प्रसाद का आनंद लिया। प्रसाद वितरण के बाद पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा देते हुए पौधरोपण का भी आयोजन किया गया।
स्थानीय निवासी भावनात्मक स्वर में कहते हैं, “भगवान का भंडारा होता है तो लोग बिना बुलाए ही खिंचे चले आते हैं – चाहे वह मजदूर हो या मोटरसाइकिल वाला, कोई नहीं रुकता।” आयोजन में कुशल चंद्राकर, कैलाश चंद्राकर, संजय चंद्राकर, जनक चंद्राकर, मुकेश चंद्राकर, पत्रकार हजारी चंद्राकर, आयुष, रुद्रा, आर्यन चंद्राकर सहित ग्रामवासियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब सेवा में श्रद्धा जुड़ती है तो वह भक्ति का रूप ले लेती है। ग्राम नवापारा में यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था की मिसाल है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए हुए है।

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