रियासतकालीन परंपरा और आधुनिक जनआस्था का संगम बुधवार को कवर्धा राजमहल में देखने को मिला। अवसर था कवर्धा रियासत के राजा और पूर्व विधायक योगेश्वर राज के जन्मदिन का। नवरात्रि और दशहरा के पावन पर्व के साथ यह उत्सव दोगुनी धूमधाम से मनाया गया।
सुबह से ही दूर-दराज़ इलाकों से लोग राजमहल पहुँचे। समर्थकों और ग्रामीणों ने परंपरागत ढंग से अपने “महाराज” को बधाई दी। राजमहल के प्रांगण में श्रद्धा, सम्मान और उत्सव का अनूठा संगम दिखाई दिया।
इस मौके पर जगदंबिका साहू, महेंद्र कौशिक, मुकुंद माधव कश्यप, उदय मरावी (सरपंच लुप), प्रमोद कौशिक सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में राजा योगेश्वर राज को दीर्घायु और सशक्त नेतृत्व की शुभकामनाएँ दीं।
लोगों का कहना था कि योगेश्वर राज सिर्फ रियासत की विरासत नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और परंपराओं के संरक्षक भी हैं। दशहरा और नवरात्रि जैसे पर्व पर उनका जन्मदिन आस्था और उत्सव का प्रतीक बन गया।