कवर्धा, दीपावली पर्व की रौनक के बीच कवर्धा जिले में पटाखा दुकानों से जुड़ी सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। एक ओर जिला प्रशासन ने अग्निशमन विभाग और एसडीआरएफ मुख्यालय रायपुर के दिशा-निर्देशों के अनुसार आग से बचाव और जनसुरक्षा को लेकर विस्तृत एडवायजरी जारी की है, वहीं दूसरी ओर साप्ताहिक हाट बाजारों में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
एडवायजरी के मुताबिक—सभी पटाखा दुकानों का निर्माण अज्वलनशील सामग्री से किया जाना चाहिए, दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी, खुले बिजली कनेक्शन पर रोक, और डीसीपी अग्निशामक यंत्र व पानी की पर्याप्त व्यवस्था अनिवार्य है। साथ ही 50 मीटर के दायरे में आतिशबाज़ी प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। जिले के तरेगांव ,दलदली , चिल्फी , बोककरखर, रेंगखार, कुई,कुकदूर , पोलमी सहित अन्य हाट बाजारों में मध्यप्रदेश सीमा से आने वाले व्यापारी भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बिना किसी अनुमति या सुरक्षा इंतज़ाम के पटाखों की बिक्री कर रहे हैं। न तो अग्निशामक यंत्र हैं, न सुरक्षा दूरी, और न ही प्रशासनिक निगरानी। यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
जन सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मामला अब प्रशासन की दोहरी नीति पर सवाल खड़े कर रहा है — “एक तरफ़ कागज़ पर सख्त एडवायजरी, दूसरी तरफ़ ज़मीन पर धधकता बारूद!”
छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन नियामावली 2021 के तहत नियम उल्लंघन पर कार्यवाही का प्रावधान है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित रहेगी या दीपावली से पहले प्रशासन वास्तव में सख्ती दिखाएगा ।