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कटिंग में खुली पोल, पिपरिया–गांगपुर सड़क पर कलेक्टर का छापा, गुणवत्ता पर सख्त चेतावनी

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 जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत परखने खुद कलेक्टर गोपाल वर्मा जब पिपरिया–गांगपुर सड़क पर औचक निरीक्षण में पहुंचे, तो महज कागजी प्रगति से संतोष नहीं किया। मौके पर ही सड़क की कटिंग कराकर डामर की मोटाई नपवाई गई और मटेरियल की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए गए। निरीक्षण ने साफ संकेत दे दिया कि निर्माण की “चमकती सतह” के नीचे क्या है, इसे अब प्रशासन परखे बिना नहीं छोड़ेगा।

यह सड़क लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई जा रही है। कार्यपालन अभियंता ने बताया कि फिलहाल डामर की लेयर बिछाई गई है और कॉम्पैक्शन शेष है। लेकिन सवाल यह है कि यदि सब कुछ मानकों के अनुरूप है, तो औचक कटिंग की नौबत क्यों आई? सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में सड़क की गुणवत्ता को लेकर पहले भी फुसफुसाहट थी, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया।

कटिंग, मोटाई और बिटुमिन कंटेंट पर जांच

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सड़क के बीच और शोल्डर के पास सैंपल कटिंग कराकर डामर की मोटाई मापने को कहा। साथ ही सैंपल में बिटुमिन कंटेंट की जांच के निर्देश दिए। यह वही बिंदु है जहां अक्सर निर्माण में “बचत” की आशंका जताई जाती है—कम मोटाई, घटिया मिश्रण या निर्धारित मात्रा से कम सामग्री का उपयोग। कलेक्टर ने साफ कहा कि तय मापदंड से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।

ठेकेदार ही नहीं, अधिकारी भी जिम्मेदार

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि गुणवत्ता में लापरवाही मिली तो केवल ठेकेदार ही नहीं, विभागीय इंजीनियरों पर भी कार्रवाई होगी। नियमित फील्ड मॉनिटरिंग के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, साइट पर मौजूदगी अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान एसडीएम चेतन साहू, डिप्टी कलेक्टर आर बी देवांगन और ईई पीडब्ल्यूडी रंजीत घाटगे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सामुदायिक भवन में भी कसौटी पर गुणवत्ता

सड़क के बाद कलेक्टर ने पिपरिया नगर पंचायत में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन का निरीक्षण किया, जहां प्रथम तल का कार्य जारी है। यहां भी स्वीकृत कार्य और वास्तविक प्रगति के बीच सामंजस्य पर सवाल उठे। कलेक्टर ने सीएमओ से अब तक हुए कार्यों का विस्तृत ब्योरा मांगा और गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने के निर्देश दिए।

संदेश साफ: अब ‘औचक’ ही असली टेस्ट

कवर्धा में यह निरीक्षण महज औपचारिकता नहीं, बल्कि निर्माण एजेंसियों के लिए चेतावनी माना जा रहा है। पिछले वर्षों में कई निर्माण कार्य समय से पहले उखड़ने और दरारें पड़ने के कारण सवालों में रहे हैं। ऐसे में मौके पर कटिंग कर गुणवत्ता परखना इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब सतही रिपोर्ट से आगे बढ़कर ठोस जांच की राह पर है।

फिलहाल सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं—क्या कटिंग में सब कुछ मानक के अनुरूप निकलेगा या निर्माण एजेंसी पर गाज गिरेगी? इतना तय है कि इस औचक कार्रवाई ने निर्माण कार्यों में “चलता है” संस्कृति पर सीधा प्रहार किया है।

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