विशेष रूप से कमजोर जनजाति (PVTG) बैगा समुदाय के आवास निर्माण कार्यों में भारी लापरवाही और कार्ययोजना की धज्जियाँ उड़ाने का मामला सामने आया है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए ₹342.090 लाख की बड़ी राशि PFMS के माध्यम से कलेक्टर कबीरधाम को आवंटित की गई थी। उद्देश्य था—बैगा समुदाय के हितग्राहियों के लिए स्वीकृत आवासों का निर्माण।
लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि यह योजना फाइलों में आगे बढ़ती रही और गांवों में अधूरी पड़ी रही।
योजना की वास्तविक स्थिति—नींव से आगे नहीं बढ़ा “आवास”
कई हितग्राही महीनों से आवास निर्माण की राह देख रहे हैं।
बोक्करखार निवासी सक्कु ने बताया—
“मेरे घर की तो सिर्फ नींव खुदाई हुई है। बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं।”
किसी का काम नींव तक रुका है, किसी का केवल कलम भराई पर—कुल मिलाकर निर्माण कार्य लगभग ठप है।
तकनीकी सहायक के रिश्तेदार को ठेका? लाभार्थियों में आक्रोश
जानकारी यह भी सामने आई है कि कार्य को तकनीकी सहायक पवन चंद्रवंशी के एक रिश्तेदार को ठेके पर दिया गया था।
पहली किस्त का उपयोग कर निर्माण शुरू तो किया गया, लेकिन महीनों से काम अधूरा पड़ा है।
इससे विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय में गहरा आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि—
“निर्माण कार्य तत्काल पूर्ण कराया जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।”
जनपद पंचायत बोड़ला में राशि हस्तांतरित—फिर भी काम अधूरा
आवास निर्माण के लिए स्वीकृत राशि जनपद पंचायत बोड़ला के खाते में स्थानांतरित की गई थी।
इसके बावजूद बैगा हितग्राहियों की उम्मीदें आज भी मलबे और अधूरे ढांचे के बीच पड़ी हुई हैं।
सवाल बड़ा और गंभीर है
जब राशि जारी हो चुकी, आदेश स्पष्ट हैं और एजेंसी निर्धारित है, फिर बैगा हितग्राहियों के घर क्यों नहीं बने?
यह मामला न केवल सरकारी तंत्र की सुस्ती बल्कि योजना क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
बैगा समुदाय मांग कर रहा है कि योजना की समीक्षा, जिम्मेदारों की जवाबदेही और अधूरे आवासों का शीघ्र निर्माण सुनिश्चित किया जाए।