भारतीय इतिहास, संस्कृति और संविधान पर 13वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न 1500 से अधिक इतिहासकारों की उपस्थिति, भारतीय दृष्टि से इतिहास लेखन पर जोर
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR), हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय इतिहास, संस्कृति और संविधान विषयक 13वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन–2025 भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में देशभर से 1500 से अधिक इतिहासकार, शिक्षाविद व शोधार्थी शामिल हुए।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय इतिहास को भारतीय दृष्टि और सांस्कृतिक आत्मा के बिना नहीं समझा जा सकता। उन्होंने इतिहास लेखन की प्रामाणिकता और मौलिकता को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास समाज को दिशा देने वाला मार्गदर्शक है, और इसके लिए शोध कार्य भारतीय चिंतन व सत्यपरक तथ्यों पर आधारित होने चाहिए।
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह आयोजन इतिहास लेखन में भारतीय परिप्रेक्ष्य की नई शोध-आधारित दृष्टि प्रदान करेगा।
कार्यक्रम में ICHR अध्यक्ष प्रो. रघुवेंद्र तंवर, गोपाल नारायण सिंह, डॉ. देवि प्रसाद सिंह, डॉ. ओम् जी उपाध्याय, डॉ. नरेंद्र शुक्ल, रमाकांत दुबे, आनंद प्रकाश वर्मा, कर्मवीर धुरंधर सहित देश के अनेक वरिष्ठ इतिहासकार उपस्थित रहे।
सम्मेलन में प्राचीन भारत, मध्यकाल, स्वतंत्रता संग्राम, सांस्कृतिक विरासत, भारतीय संविधान और समकालीन इतिहास पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। विद्वानों ने भारतीय इतिहास की मौलिक परंपरा और उसके वैश्विक महत्व पर विचार साझा किया।
समापन सत्र में आयोजक मंडल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह आयोजन भारतीय इतिहास लेखन में भारतीय दृष्टि को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।