समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत वर्षों से लंबित पड़े निर्माण कार्यों को लेकर जिला प्रशासन ने सख़्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक स्वीकृत सभी अपूर्ण निर्माण कार्यों को आगामी 31 मार्च 2026 तक हर हाल में पूर्ण कराया जाए, अन्यथा संबंधित क्रियान्वयन एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर दीपक सोनी ने बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में पीएमश्री शालाओं, समग्र शिक्षा (प्रारंभिक एवं माध्यमिक), बीआईजीएस तथा स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति पर असंतोष जताते हुए कहा कि जिन ग्राम पंचायतों द्वारा निर्माण कार्यों में रुचि नहीं ली जा रही है, उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार का नया कार्य स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देशित किया कि जो निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं, उनके पूर्णता प्रमाण पत्र आवश्यक दस्तावेजों सहित एक माह के भीतर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, संबंधित नगर पालिका अधिकारी एवं नगर पंचायत के माध्यम से प्रस्तुत किए जाएं। वहीं, जो कार्य अभी भी अपूर्ण हैं, उन्हें एक माह के भीतर पूर्ण कर प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जमा कराने के निर्देश दिए गए।
इसके अतिरिक्त, पूर्व वर्षों में पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र और सभी वांछित दस्तावेज जनवरी 2026 तक सभी क्रियान्वयन एजेंसियों—लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, क्रेडा, जनपद पंचायत, नगर पालिका एवं नगर पंचायत—द्वारा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शिक्षा अधोसंरचना से जुड़े निर्माण कार्यों में लापरवाही, विलंब और दस्तावेजों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निर्माण ही शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की बुनियाद है।
समीक्षा बैठक में जिला मिशन समन्वयक नरेन्द्र वर्मा, डीईओ कार्यालय से के.के. गुप्ता, एपीसी समग्र शिक्षा खिलावन वर्मा, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा एवं क्रेडा के कार्यपालन अभियंता, जिले के सभी जनपद पंचायत सीईओ, बीआरसी समग्र शिक्षा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे