छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग द्वारा हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से संचालित सघन वृक्षारोपण योजना जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नज़र आ रही है। सहसपुर लोहारा वन मण्डल, कवर्धा अंतर्गत कूप क्रमांक IV किरचाटोला (RDF), कक्ष क्रमांक 289, परिसर सूरजपुरा में वर्ष 2017-18 में किए गए वृक्षारोपण कार्य की स्थिति चिंताजनक और सरकारी दावों की पोल खोलने वाली है।

वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, संयुक्त वन प्रबंधन समिति धनौरा के माध्यम से यहां 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 55,000 मिश्रित प्रजाति (3×3 मीटर अंतराल) के पौधे लगाए गए थे। कागज़ों में यह योजना पर्यावरणीय सफलता का उदाहरण हो सकती है, लेकिन मौके पर हालात इसके ठीक उलट हैं।

जमीनी सच्चाई:
उक्त रोपण क्षेत्र वन रक्षक निवास के समीप और सड़क किनारे स्थित है, जहां सुरक्षा के लिए लगाए गए कांटेदार तार और खंभे पूरी तरह तोड़ दिए गए हैं।
सड़क किनारे के छोटे-छोटे पौधे काट दिए गए,
कटे हुए स्थानों पर पुनः रोपण नहीं किया गया,
मिश्रित प्रजातियों के साथ लगाए गए सागौन के पौधे कटाई और चराई के शिकार हो चुके हैं।
स्थिति यह है कि अब वहां वृक्षारोपण कम और उजाड़ मैदान अधिक दिखाई देता है

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