जिला कबीरधाम के थाना पाण्डातराई क्षेत्र में पुलिस ने मवेशी चोरी एवं क्रूरता पूर्वक अवैध परिवहन के एक गंभीर मामले का खुलासा करते हुए 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि इस संगठित अपराध में 02 नाबालिकों की संलिप्तता भी सामने आई है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान चोरी गया 01 नग भैंसा सहित कुल 21 मवेशियों को सुरक्षित मुक्त कराया, जिन्हें पैदल हांकते हुए कत्लखाना ले जाया जा रहा था।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पुष्पेन्द्र बघेल एवं श्री अमित कुमार पटेल (रा.पु.से.), तथा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) बोड़ला श्री अखिलेश कुमार कौशिक (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी पाण्डातराई कमलाकांत शुक्ला के नेतृत्व में की गई।
प्रकरण की शुरुआत 04 जनवरी 2026 को हुई, जब प्रार्थी रोहित यादव, निवासी ग्राम डोंगरिया कला ने थाना पाण्डातराई में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 03 जनवरी 2026 की रात्रि उसके घर के कोठा से खुंटे में बंधा 01 भैंसा अज्ञात चोर द्वारा चोरी कर लिया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की।
विवेचना के दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि चोरी गया मवेशी तथा अन्य मवेशियों को बिना चारा-पानी दिए, क्रूरता पूर्वक पैदल हांकते हुए डोंगरिया कला से खरहट्टा कला की ओर कत्लखाना ले जाया जा रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश देकर किशन कुमार डाहिरे एवं विजय कुमार टंडन, दोनों निवासी ग्राम कुई, थाना कुकदूर, जिला कबीरधाम को 02 नाबालिकों के साथ हिरासत में लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने 20 मवेशियों को अवैध रूप से कत्लखाना ले जाना तथा 01 भैंसा चोरी करना स्वीकार किया। वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु नोटिस दिए जाने पर कोई दस्तावेज नहीं पाए गए। पुलिस ने मौके से 20 नग भैंसा (अनुमानित मूल्य ₹2,00,000) एवं चोरी गया 01 भैंसा (मूल्य ₹40,000) जप्त किया।
आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4), 305(क), छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। दोनों वयस्क आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत करने पर जिला जेल कवर्धा भेजा गया, जबकि दोनों नाबालिकों को बाल संप्रेक्षण गृह दाखिल किया गया।
यह कार्रवाई न केवल मवेशी तस्करी पर एक सख्त संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अपराध में नाबालिकों की बढ़ती संलिप्तता एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही है, जिस पर सख्त निगरानी और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।