मोदी सरकार पर मनरेगा जैसी देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर कर खत्म करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने इसे गरीब और मजदूर वर्ग के खिलाफ साजिश करार दिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर चल रहे “मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान” के तहत जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री गुरु रूद्र कुमार ने कहा कि मनरेगा एक केंद्रीय कानून था, जिसमें पहले 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब इसे 60:40 के अनुपात में बदलकर केंद्र अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। इतना ही नहीं, केंद्र ने यह शर्त भी जोड़ दी है कि जब तक राज्य पहले अपनी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी जमा नहीं करेगा, तब तक केंद्र का पैसा जारी नहीं होगा। यह व्यवस्था जानबूझकर बनाई गई है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर राज्य मजदूरों को काम ही न दे सकें।
उन्होंने कहा कि इस बदलाव का सीधा अर्थ है — मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करना। बजट का बोझ राज्यों पर डालकर मजदूरों के हाथ से रोजगार छीना जा रहा है। यह भाजपा सरकार की गरीब-विरोधी और मजदूर-विरोधी सोच को उजागर करता है।
गुरु रूद्र कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब तथाकथित “V.B.G.RAM.G.” योजना के नाम पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्यों पर डालना चाहती है और उनसे 40 प्रतिशत खर्च उठाने की अपेक्षा कर रही है। उन्होंने इसे संघीय ढांचे पर सीधा हमला और राज्यों की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश बताया।
उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी आपदा के समय मनरेगा ने करोड़ों गरीब परिवारों को भुखमरी से बचाया, लेकिन आज उसी योजना पर सबसे ज्यादा हमला किया जा रहा है। नया प्रावधान साफ तौर पर गरीब-मजदूर विरोधी है।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने कहा कि 100 दिन से 125 दिन रोजगार देने की बातें केवल राजनीतिक जुमला हैं। सच्चाई यह है कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार किसी भी वर्ष औसतन 100 दिन का रोजगार नहीं दे पाई। राष्ट्रीय औसत महज 38 दिन रहा है। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ के लगभग 70 प्रतिशत गांवों में भाजपा सरकार आने के बाद मनरेगा कार्य लगभग ठप हो गया है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरों का कानूनी अधिकार था, जिसे अब केंद्र सरकार ने एक प्रशासनिक कृपा बना दिया है, जो पूरी तरह उसकी मर्जी पर निर्भर है। भगवान राम के नाम पर योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है, लेकिन जिन नीतियों को “राम” बताया जा रहा है, उनका गरीबों से कोई सरोकार नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस सचिव वीरेंद्र जांगड़े ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा की कानूनी गारंटी बहाल नहीं की गई, केंद्र सरकार की पूर्ण वित्तीय जिम्मेदारी तय नहीं हुई और मजदूरों को पूरा रोजगार नहीं मिला, तो कांग्रेस पार्टी राज्य-भर में उग्र जन आंदोलन छेड़ेगी।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, जिला एवं शहर पदाधिकारी, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, किसान कांग्रेस, सेवादल, एनएसयूआई सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।