जिला मुख्यालय से सटे सोनबरसा-लटुवा जंगल में इन दिनों वन माफियाओं और कुछ स्थानीय ग्रामीणों द्वारा रोज़ाना सुनियोजित तरीके से लकड़ी चोरी की जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हर रोज़ सुबह करीब 5 बजे आसपास के ग्रामीण जंगल के भीतर घुसकर पेड़ काटते हैं और बेखौफ लकड़ी बाहर निकाल ले जाते हैं। जंगल की सुरक्षा के लिए लगाई गई जाली तार को जानबूझकर तोड़ दिया गया है, जिससे न केवल चोरी आसान हो गई है, बल्कि जंगली जानवरों का गांव की ओर निकलना भी शुरू हो गया है।
बीट गार्ड गायब, पेट्रोलिंग शून्य
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लटुवा-सोनबरसा जंगल क्षेत्र में न तो कोई चौकीदार दिखता है और न ही बीट गार्ड। वन विभाग की नियमित पेट्रोलिंग पूरी तरह ठप है, जिससे लकड़ी तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
वन्यजीवों पर सीधा खतरा
इस जंगल में हिरण, बारहसिंगा, जंगली सूअर, खरगोश, वन भैंसा सहित कई संरक्षित वन्य प्राणी मौजूद हैं। लकड़ी कटाई और मानवीय दखल से इनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का खुला उल्लंघन है।
कानून क्या कहता है
भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत बिना अनुमति लकड़ी कटाई अपराध है
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्रों में हस्तक्षेप दंडनीय
राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार वन क्षेत्र की सुरक्षा वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी
इसके बावजूद शिकायत के बाद भी SDO और वन विभाग कार्यालय को सूचना देने पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
इस खबर का उद्देश्य वन संपदा और वन्यजीवों की रक्षा, वन विभाग की जवाबदेही तय करना और जंगल की नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित कराना है।


