बलौदा बाजार। जिले में अवैध ईंट भट्ठों के खिलाफ कार्रवाई का ढोल तो पीटा जा रहा है, लेकिन हकीकत में यह मुहिम चुनिंदा स्थानों तक ही सिमटी नजर आ रही है। प्रशासन ने पलारी क्षेत्र में लगभग 10 लाख अवैध ईंटों पर कार्रवाई करते हुए जब्ती की कार्रवाई की, वहीं लवन में भी एक भट्ठे पर औपचारिक कार्रवाई की गई। परंतु सवाल यह है कि क्या पूरे जिले में अवैध संचालन केवल इन्हीं दो जगहों तक सीमित था।
जानकारों का दावा है कि जिले के कई ग्रामीण इलाकों में बिना वैध अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति और आवश्यक राजस्व दस्तावेजों के दर्जनों ईंट भट्ठे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की नजर बाकी स्थानों पर क्यों नहीं पहुंच पा रही? क्या यह महज संयोग है या फिर किसी विशेष संरक्षण की कहानी।
पलारी में 10 लाख ईंटों की जब्ती से साफ है कि अवैध कारोबार का पैमाना छोटा नहीं है। इतने बड़े स्तर पर ईंट निर्माण बिना अधिकारियों की जानकारी के संभव नहीं माना जा सकता। ऐसे में यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि यदि एक जगह इतना बड़ा भंडार मिला, तो अन्य स्थानों की जांच क्यों नहीं की जा रही?
लवन में हुई कार्रवाई को भी लोग प्रतीकात्मक कदम मान रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जिले में कई और भट्ठे खुलेआम चल रहे हैं, जहां नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लेकिन उन पर न तो छापा पड़ रहा है, न नोटिस जारी हो रहा है।
ग्रामीणों में चर्चा है कि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के कारण कुछ भट्ठों पर प्रशासन की “कृपा दृष्टि” बनी हुई है। पर्यावरण प्रदूषण, कृषि भूमि की क्षति और मजदूरों के शोषण जैसे गंभीर मुद्दों के बावजूद व्यापक अभियान की कोई ठोस रूपरेखा नजर नहीं आ रही।
अब सवाल यही है कि क्या प्रशासन शेष अवैध भट्ठों पर भी निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर पलारी और लवन की कार्रवाई को ही उपलब्धि बताकर बाकी मामलों पर पर्दा डाल दिया जाएगा? जिले की जनता अब आधी-अधूरी नहीं, बल्कि व्यापक और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है।