ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में भाटापारा विकासखंड के ग्राम पंचायत धनेली में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत यहां वर्षों से उपेक्षित छोटे तालाब का गहरीकरण एवं एक किनारे पचरी निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इस कार्य से गांव को पानी की समस्या से राहत मिलने लगी है, वहीं महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह मिली है।
तालाब में वर्षों से जमी गाद के कारण जल संग्रहण क्षमता काफी कम हो गई थी, जिससे गर्मियों में पानी की किल्लत गंभीर हो जाती थी। ग्रामीणों की मांग पर पंचायत ने तालाब के गहरीकरण और पचरी निर्माण का प्रस्ताव रखा, जिसे मनरेगा के माध्यम से क्रियान्वित किया गया। गहरीकरण के बाद तालाब की जलधारण क्षमता करीब 800-900 घन मीटर से बढ़कर 1500 घन मीटर तक पहुंच गई है। इससे गांव के करीब 20 हेक्टेयर खेतों में सिंचाई संभव हो पाई है, जो ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर है।
इस कार्य की खास बात यह रही कि इसमें महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। महिलाओं ने न सिर्फ निर्माण कार्य में श्रमदान किया, बल्कि कार्यस्थल की स्वच्छता, निगरानी और समन्वय का जिम्मा भी संभाला। इस दौरान उन्हें नियमित मजदूरी के रूप में आय का साधन मिला और आत्मविश्वास भी बढ़ा। अब महिलाएं मछली पालन जैसी आजीविका गतिविधियों की ओर भी अग्रसर हो रही हैं।
ग्राम पंचायत और ग्रामीणों का मानना है कि इस पहल से जल संकट से राहत मिलने के साथ गांव में आजीविका के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। तालाब गहरीकरण एवं पचरी निर्माण जैसे कार्य ग्राम विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।