कबीरधाम जिला आज भी भवन निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का गढ़ बना हुआ है। जिले में अधिकांश ठेकेदारों के पास या उनके संरक्षण में जगह-जगह फ्लाई ऐश ईंट बनाने के प्लांट संचालित हो रहे हैं। इन प्लांटों में बनाई जा रही ईंटें भवन निर्माण कार्यों में उपयोग हो रही हैं, लेकिन गुणवत्ता की जांच और वास्तविक उपयोग में बड़ा खेल सामने आ रहा है।
सूत्र बताते हैं कि गुणवत्ता परीक्षण के लिए अलग ईंट तैयार की जाती है और भवन निर्माण में उपयोग के लिए अलग ईंटों का इस्तेमाल होता है। यह स्थिति “हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और” जैसी है।
तकनीकी अधिकारी बने ‘मदारियों की बंदरी’
निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे तकनीकी अमले की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। निरीक्षण और गुणवत्ता की पुष्टि करने की बजाय अधिकारी ठेकेदारों के इशारे पर नाचते हुए नजर आते हैं। जनता का कहना है कि ये अधिकारी “मदारियों की बंदरी” की तरह केवल दिखावे के लिए सक्रिय रहते हैं, जबकि हकीकत में अनियमितताओं को बढ़ावा दे रहे हैं।
राजनीतिक संरक्षण से बढ़ रही मनमानी
कबीरधाम जिला पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री और मौजूदा उप मुख्यमंत्री जैसे दिग्गज नेताओं का गढ़ माना जाता है। वर्षों से बड़े-बड़े पदों पर यहां के जनप्रतिनिधि आसीन रहे हैं। इसके बावजूद जिले में विकास कार्यों की सच्चाई यही है कि भवन निर्माण जैसे मूलभूत काम भी भ्रष्टाचार और मनमानी का शिकार हो रहे हैं।
एक बार जांच के बाद बदल जाती गुणवत्ता
जानकारी के मुताबिक, जब भी ईंट की गुणवत्ता जांच होती है, ठेकेदार उच्च गुणवत्ता की ईंटें प्रस्तुत करते हैं। लेकिन जांच पूरी होते ही वास्तविक निर्माण में घटिया ईंटों का उपयोग किया जाने लगता है। यह धोखाधड़ी सीधे जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई और शासन की राशि पर चोट कर रही है।