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“भोरमदेव अभ्यारण्य में तितलियों का नया संसार: तीन दिवसीय ‘तितली सम्मेलन 2025’ में दर्ज हुईं 5 नई प्रजातियाँ, कुल संख्या पहुँची 134”

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कवर्धा , जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल के रूप में भोरमदेव अभ्यारण्य में आयोजित तीन दिवसीय “तितली सम्मेलन 2025” (द्वितीय संस्करण) का समापन रविवार को चिल्फी में हुआ।
10 से 12 अक्टूबर तक चले इस आयोजन ने न केवल तितलियों की नई प्रजातियों की पहचान में सफलता पाई, बल्कि स्थानीय समुदाय को भी संरक्षण अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया।
तीन दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने भोरमदेव अभ्यारण्य के विभिन्न हिस्सों में 5 नई तितली प्रजातियों को दर्ज किया। इस खोज के साथ अभ्यारण्य में अब तक दर्ज तितलियों की कुल संख्या 134 प्रजातियों तक पहुँच गई है — जो राज्य की जैव विविधता में एक नई उपलब्धि है।
कार्यक्रम के दौरान अभ्यारण्य की अधीक्षक अनीता साहू ने तितली संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़ी भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि अभ्यारण्य क्षेत्र में तितलियों के संरक्षण के लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी को सशक्त किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरक पहल के रूप में प्रतिभागियों एवं अधिकारियों द्वारा नींबू पौधों (होस्ट प्लांट) का पौधारोपण किया गया तथा स्मृति चिन्ह के रूप में प्रतिभागियों को पौधे भी भेंट किए गए।
प्रतिभागियों को बैगा ग्राम का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ उन्होंने आदिवासी समाज की परंपरागत पारिस्थितिक समझ और जैव विविधता संरक्षण के प्रति उनकी भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।
वनमंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने कहा कि, “तितली सम्मेलन से प्राप्त आंकड़े और अनुभव भविष्य में भोरमदेव अभ्यारण्य की तितली संरक्षण प्रबंधन योजना को और सुदृढ़ बनाएंगे। यह आयोजन केवल अध्ययन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति समाज की जागरूकता बढ़ाने का माध्यम है।”
समापन अवसर पर श्रीमती अनिता साहू (अधीक्षक, भोरमदेव अभ्यारण्य), श्री लाल सिंह मरकाम (परिक्षेत्र अधिकारी चिल्फी), श्री अनुराग वर्मा (परिक्षेत्र अधिकारी भोरमदेव), श्री विक्रांता सिंह (प्रशिक्षु वनक्षेत्रपाल) सहित भोरमदेव एवं चिल्फी के समस्त अधिकारी, कर्मचारी एवं वनमंडल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
 विशेष महत्व:
जैव विविधता संरक्षण के लिए जनसहभागिता को बढ़ावा।
5 नई प्रजातियों की खोज — विलुप्ति से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
पारिस्थितिक पर्यटन और स्थानीय समुदाय की भूमिका को सशक्त करने वाला आयोजन।

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