जिले के रवान क्षेत्र अंतर्गत सुदीपार से मलदी पहुंच मार्ग (सत्र 2023–24) पर निर्मित सी.सी. रोड की वर्तमान स्थिति को लेकर ग्राम भदरापाली एवं खैरताल में स्थानीय नागरिकों द्वारा चिंता व्यक्त की जा रही है। ये दोनों गांव अंबुजा सीमेंट प्लांट के आहता से जुड़े हुए हैं तथा औद्योगिक गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र होने के साथ-साथ गोद ग्राम की श्रेणी में भी आते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, सीमेंट प्लांट के आहाते से लगे इस मार्ग पर बनी सी.सी. रोड कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त अवस्था में दिखाई दे रही है। सड़क की सतह में टूट-फूट, दरारें और असमानता के कारण आवागमन में कठिनाई हो रही है, जिससे स्कूली बच्चों, कृषकों और दैनिक जरूरतों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गोद ग्राम योजना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) से जुड़े कार्यों का मूल उद्देश्य स्थानीय समुदाय के जीवन स्तर में सुधार, सुरक्षित बुनियादी ढांचा और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना होता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा की स्थिति यह संकेत देती है कि अपेक्षित स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण एवं अनुरक्षण व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पाई है।
नियम व अधिनियमों के संदर्भ में
सड़क निर्माण कार्यों में भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देश, ग्रामीण सड़क निर्माण मानक, तथा सीमेंट कंक्रीट रोड के लिए निर्धारित तकनीकी स्पेसिफिकेशन का पालन किया जाना अनिवार्य माना जाता है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक उपयोग के कार्यों में गुणवत्ता परीक्षण (Quality Control Tests), कार्य पूर्णता के बाद अनुरक्षण अवधि (Defect Liability Period) तथा नियमित निरीक्षण जैसे प्रावधानों का उद्देश्य सड़क की दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित करना होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता, मोटाई, क्योरिंग प्रक्रिया और जल निकासी व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी जाए, तो सी.सी. रोड की आयु और उपयोगिता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।
स्थानीय अपेक्षाएं
ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासन एवं संस्थाओं से मांग की है कि सड़क की संयुक्त तकनीकी जांच कराई जाए, निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक मरम्मत या सुधारात्मक कार्य कराया जाए तथा भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों में पारदर्शी निगरानी तंत्र को और सशक्त किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि गोद ग्राम की भावना तभी सार्थक होगी जब बुनियादी सुविधाएं केवल कागजों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर टिकाऊ और सुरक्षित रूप में उपलब्ध हों।