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मैकाल पर्वत की वादियों में बच्चों ने सीखा प्रकृति, आयुर्वेद और जल संरक्षण का अनमोल ज्ञान

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 प्रकृति, परंपरा और शिक्षा के अद्भुत संगम का साक्षी बना मैकाल पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत आने वाला ग्राम बकेला, जहां बैगा समाज छत्तीसगढ़ और ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के संयुक्त नेतृत्व में स्व. श्री शिकारी बैगा शासकीय प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए ‘प्रकृति एवं औषधीय ज्ञान’ विषय पर आधारित विशेष शैक्षणिक वन भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक सामान्य भ्रमण नहीं, बल्कि बच्चों को प्रकृति से जोड़ने, पारंपरिक ज्ञान से परिचित कराने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने की एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।
सुबह 5 बजे भोर की पहली किरणों के साथ जब मैकाल पर्वत श्रृंखला हरियाली और शीतल वातावरण से आच्छादित थी, तब विद्यालय के बच्चों का दल जंगलों, तालाबों और प्राकृतिक स्थलों की ओर रवाना हुआ। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और जिज्ञासा साफ झलक रही थी। इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को जंगल, जल स्रोत, जैव विविधता और औषधीय पौधों के महत्व से अवगत कराना था, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ सके।
कार्यक्रम में बैगा समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष श्री इतवारी मछिया ने मार्गदर्शक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों को जंगल के बीच जीवंत पाठशाला का अनुभव कराते हुए अनेक औषधीय पौधों और वृक्षों की पहचान कराई। उन्होंने विशेष रूप से ‘अमलतास’ जैसे औषधीय महत्व वाले पेड़ों के गुणों की जानकारी देते हुए बताया कि हमारे पूर्वज जंगलों से प्राप्त वनौषधियों के माध्यम से विभिन्न बीमारियों का उपचार करते थे। उन्होंने बच्चों को समझाया कि जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, स्वास्थ्य और संस्कृति के संरक्षक हैं। श्री मछिया ने कहा कि यदि नई पीढ़ी को पारंपरिक वन ज्ञान से नहीं जोड़ा गया, तो आने वाले समय में यह बहुमूल्य धरोहर धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी।
वन भ्रमण के दौरान स्व. श्री शिकारी बैगा के वंशज श्री केवल सिंह चिखलिया ने बच्चों को जल स्रोतों और जैव विविधता संरक्षण के महत्व की जानकारी दी। तालाब किनारे उन्होंने विभिन्न पक्षियों की पहचान कराते हुए बताया कि छोटे-छोटे जल स्रोत भी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बच्चों को जल संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि भविष्य सुरक्षित रखना है तो पानी बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में श्री राजीव मोहंती फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी रायपुर की सहभागिता और ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के कार्यकारी निदेशक श्री चंद्रकांत यादव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता बचाने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को प्रकृति के बीच ले जाकर जीवन के वास्तविक ज्ञान से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है।
ग्रामोदय ग्राम विकास समिति की यह पहल ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में शिक्षा के नए आयाम प्रस्तुत करती नजर आई, जहां बच्चों को पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति और आधुनिक शिक्षा के संतुलन के साथ सीखने का अवसर मिला। इस वन भ्रमण ने बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व की भावना विकसित की।
स्व. श्री शिकारी बैगा शासकीय प्राथमिक विद्यालय के बच्चे इस भ्रमण से एक समृद्ध अनुभव और नई सीख लेकर लौटे। यह आयोजन केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि बैगा समाज की समृद्ध परंपराओं, प्राकृतिक ज्ञान और पर्यावरण संरक्षण की भावना को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत और प्रेरणादायक कदम बनकर उभरा। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित करने का संकल्प दोहराया, ताकि बच्चे अपनी संस्कृति, जंगल और प्रकृति के सच्चे रक्षक बन सकें

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