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क्रेशर प्लांट में युवक की मौत से मचा हड़कंप, सुरक्षा नियमों और वैध संचालन पर उठे गंभीर सवाल

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 थाना लोहारा क्षेत्र अंतर्गत स्थित क्रेशर प्लांट परिसर में युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान दीपक तिवारी पिता रेवती रमन तिवारी उम्र लगभग 25 वर्ष निवासी गौरमाटी, हाल मुकाम शांति नगर लोहारा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि युवक 21 मई 2026 की रात्रि से लापता था, जिसके बाद 22 मई 2026 को थाना लोहारा में गुम इंसान दर्ज कराया गया था। 23 मई 2026 को उसका शव बाइक सहित क्रेशर प्लांट परिसर में बरामद हुआ। पुलिस ने प्रथम दृष्टया घटना को दुर्घटनावश गिरने का मामला बताया है, वहीं मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।

घटना ने केवल एक मौत का मामला नहीं, बल्कि क्रेशर प्लांटों में सुरक्षा व्यवस्था, श्रम सुरक्षा कानूनों के पालन और संचालन की वैधता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान पर युवक का शव मिला, वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे या नहीं, यह अब जांच का अहम विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश क्रेशर प्लांटों में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जाती है। खतरनाक मशीनों, गहरे गड्ढों, भारी वाहनों और अंधेरे क्षेत्रों के बावजूद न तो चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं और न ही सुरक्षा घेराबंदी की जाती है।

सबसे बड़ा मुद्दा संबंधित क्रेशर प्लांट के वैध संचालन को लेकर भी सामने आ रहा है। क्या प्लांट के पास पर्यावरण विभाग, खनिज विभाग, ग्राम पंचायत और प्रशासन की सभी आवश्यक अनुमति मौजूद है। क्या श्रम विभाग और औद्योगिक सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। यदि सुरक्षा इंतजाम मजबूत होते तो संभवतः यह हादसा टाला जा सकता था। अब इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।

क्षेत्र में संचालित कई क्रेशर प्लांटों पर पहले भी नियमों की अनदेखी, धूल प्रदूषण, अवैध उत्खनन और असुरक्षित संचालन को लेकर शिकायतें उठती रही हैं, लेकिन कार्रवाई अक्सर कागजों तक सीमित नजर आई। यही वजह है कि एक बार फिर प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुरक्षा ऑडिट, प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था जैसे विषय अब जांच के केंद्र में हैं।

थाना लोहारा पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होने की बात कही जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले को केवल दुर्घटना मानकर सीमित न किया जाए, बल्कि क्रेशर प्लांट के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों से पूछताछ और वैध अनुमति सहित हर पहलू की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।

दीपक तिवारी की मौत ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि जिले में कई औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी किस हद तक जारी है और इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

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