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कबीरधाम में जल जीवन मिशन योजना सिर्फ आंकड़ों पर , धरातल पर मिशन का हो गया है कमीशन

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विभाग कागजों में ही जनता को पिला रहे जल
कवर्धा – कबीरधाम जिला में जल जीवन मिशन केवल फर्जी आंकड़ा प्रस्तुत कर अपनी पीठ थपथपा रहा है। केंद्रीय योजनाओं के उद्देश्य पर पानी फेर रहा है। जल जीवन मिशन भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक पहल है। इसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना है। मिशन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्थायी जल प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और बुनियादी ढाँचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।
जेजेएम को विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से लागू किया जाता है, जिसमें राज्य और स्थानीय सरकारें योजना और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वित्तीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाती है, और राज्यों को निधियों का एक हिस्सा देना आवश्यक है। मिशन अपने उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र की संस्थाओं और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ साझेदारी का भी लाभ उठाता है।
जेजेएम योजना में 959 ग्राम शामिल 
सरकार के एक साल की सफलता को लेकर जिला मुख्यालय में जनादेश परब पर प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें सरकार की उपलब्धियों की जानकारी को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया । प्रेस वार्ता में राज्य के साथ साथ कबीरधाम जिला के विभागवार जानकारी दी गई । जल जीवन मिशन योजना में जिले के 959 गांवों को शामिल किया है । जिसमें रेट्रोफिटिंग की 231, सिंगल विलेज की 542 और सोलर आधारित 210 गांव शामिल है। योजना में 163478 ग्रामीण परिवार को शामिल किया है। जिसके लिए 1062.18 करोड़ रुपए व्यय करने का प्रावधान किया गया है।
जल प्रदाय का आंकड़ा फर्जी होने की संभावना 
एक साल विष्णु देव के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रदेश के विकास और नए आयाम स्थापित किए जाने संबंधी जनादेश परब पर प्रेस वार्ता को राज्य सरकार द्वारा मनोनीत अतिथि कबीरधाम जिला कलेक्ट्रेट में पत्रकारों को संबोधित किया साथ ही पत्रकार वार्ता में जो विज्ञप्ति जारी किया गया है। जिसमें 959 गांवों में से 506 ग्रामों में जल प्रदाय प्रारंभ कर दिए जाने का उल्लेख है। योजना अंतर्गत कुल 163478 ग्रामीण परिवार को घरेलू नल कनेक्शन कराया जा चुका हैं। जो लगभग 82.03 प्रतिशत है, उल्लेख किया गया है। जबकि जिले के आधा से ज्यादा गांवों में जल जीवन योजना अंतर्गत बनाए गए नल , टंकी , पाइप लाइन बंद और अधूरा पड़ा हुआ है। फर्जी आंकड़ा लोगों के समझ से परे है।
जांच में गड़बड़ियां उजागर होने की संभावना 
राज्य सरकार की उपलब्धियों से भरा हुआ प्रेस नोट में जल जीवन मिशन योजना के आंकड़ों और उसमें किए गए व्यय , निर्माण की यदि जांच की जाए तो आधा से ज्यादा गड़बड़ी उजागर होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार के समक्ष फर्जी आंकड़ा प्रस्तुत करने वाले अधिकारी को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है। इसलिए अंत में जल जीवन मिशन योजना की क्रियान्वयन और धरातल पर एक साल सुशासन के बेमिसाल में यही कहा जा सकता है कि नल बना तो जल नहीं, जल है वहां नल नहीं, कैसी बुझेगी गरीबों की प्यास, विभाग कागजों में ही जनता को पिला रहे पानी। विभाग अपने ही सरकार के लिए झूठे और फर्जी आंकड़ों को सजाने के बदले धरातल पर क्रियान्वयन में मुस्तैदी दिखाते तो शायद हालत और स्वास्थ्य दोनों बेहतर

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