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गाँव-गाँव अर्जुन तिवारी का जनसंवाद: शोक-संवेदना से शहनाई तक, जमीनी जुड़ाव का संदेश

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दो दिनों में डेढ़ दर्जन से ज़्यादा ठिकाने, कांग्रेस महामंत्री तिवारी का पंडरिया दौरा बना सामाजिक-राजनीतिक मेलजोल की मिसाल
रायपुर // प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री और पूर्व जनपद अध्यक्ष अर्जुन तिवारी एक बार फिर मैदान में हैं—मगर इस बार बिना मंच, माइक या नारेबाज़ी के। 14 और 15 अप्रैल को उनका पंडरिया विधानसभा क्षेत्र का दौरा सामाजिक और मानवीय सरोकारों की जीवंत तस्वीर बन गया है।
कभी किसी के घर शोक संवेदना, तो कभी किसी आँगन में शहनाई की गूंज—तिवारी इन दो दिनों में मानो पंडरिया की धड़कन बन जाते हैं। करीब डेढ़ दर्जन से ज़्यादा स्थानों पर उनकी उपस्थिति केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक समझ और संवेदनशील नेतृत्व का प्रमाण है।
14 अप्रैल: संवेदनाओं से संवाद तक
शाम तीन बजे छीरपानी जोन में वैवाहिक कार्यक्रम से शुरुआत कर वे पंडरिया विश्रामगृह में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करते हैं। कुंडा में कांग्रेस अध्यक्ष उत्तरा दिवाकर के यहाँ शादी समारोह और कार्यकर्ताओं से संवाद के बाद वे रेंगाबोड़ पहुंचते हैं—जहां सुरेश चंद्राकर के परिजनों से मुलाक़ात होती है।
इसके बाद दुल्लापुर में भाजपा नेता हरिकृष्ण शुक्ला की दिवंगत माता जी को श्रद्धांजलि, और फिर कोंडापुरी में शादी समारोह में शिरकत। दिन का समापन किशुनगढ़ में रात बिताकर होता है।
15 अप्रैल: रिश्तों की बुनाई, भरोसे की डोर
दूसरे दिन की शुरुआत भी वैवाहिक कार्यक्रम से होती है—बंधु चंद्राकर के घर। फिर समरु पारा पंडरिया में रामकुमार टंडन और बलराम धृतलहरे के घर जाकर मुलाक़ात करते हैं।
पुत्कीकला में कांग्रेस नेता अजय यादव की शादी, महली में बाबूराम चंद्राकर के घर समारोह और फिर भुवालपुर में दाऊ रोहित गबेल के बेटे की शादी—हर जगह वे न सिर्फ शामिल होते हैं, बल्कि जुड़ाव की गहराई छोड़ते हैं।
अंतिम पड़ाव रायपुर में होता है—राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र शुक्ला (IAS) के निवास पर एक सामाजिक कार्यक्रम में।
एक नेता, जो मंच से नहीं, रिश्तों से राजनीति करता है
अर्जुन तिवारी का यह दौरा बताता है कि राजनीति केवल भाषण नहीं, बल्कि लोगों के सुख-दुख में शरीक होने की भावना भी है। गाँव-गाँव की चाय, बातचीत और शुभकामनाओं में उनका चेहरा नहीं, कांग्रेस की ज़मीन दिखती है।

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