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कापादह में महिला स्व-सहायता समूह के कार्य में बाधा: सरपंच से तीन दिवस में स्पष्टीकरण मांगा

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कवर्धा , जनपद पंचायत पंडरिया द्वारा ग्राम पंचायत कापादह के सरपंच को एक गंभीर शिकायत के संदर्भ में नोटिस जारी किया गया है। शिकायत “राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान” के अंतर्गत गठित माँ भगवती महिला स्व-सहायता समूह द्वारा की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत स्तर पर उन्हें पौधरोपण और नर्सरी विकास जैसे कार्यों में बाधा उत्पन्न की जा रही है।
घटना का पृष्ठभूमि
माँ भगवती महिला स्व-सहायता समूह, ग्राम कापादह में लंबे समय से मनरेगा योजना के तहत प्रस्तावित मुनगा पौधरोपण एवं नर्सरी विकास जैसे कार्यों में संलग्न है। यह समूह वंदेमातरम् संकुल संगठन के अंतर्गत कार्यरत है, जिसे उक्त कार्यों की एजेंसी के रूप में मान्यता प्राप्त है। समूह ने जनपद पंचायत पंडरिया को दी गई शिकायत में बताया कि ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच द्वारा उनके कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप एवं अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है, जिससे न केवल आजीविका के अवसरों पर असर पड़ रहा है, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में हो रहे प्रयासों को भी झटका लग रहा है।
शिकायत के मुख्य बिंदु
महिला समूह को बिना किसी वैध कारण के कार्यस्थल से हटाने या रोकने का प्रयास
पंचायत स्तर पर सहयोग की अपेक्षा अवरोध उत्पन्न करना
पौधरोपण एवं नर्सरी जैसी योजनाओं की स्थिरता पर खतरा
महिला समूह की आजीविका एवं मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव
प्रशासन की कड़ी प्रतिक्रिया
इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत पंडरिया ने पत्र क्रमांक 148-/NRLM/बिहान/ज.पं./2024-25 दिनांक 24/04/2025 के माध्यम से सरपंच, ग्राम पंचायत कापादह को निर्देशित किया है कि वे तीन दिवस के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण जनपद कार्यालय में प्रस्तुत करें। यदि निर्धारित समयावधि में जवाब प्राप्त नहीं होता या जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो पंचायत विभाग द्वारा आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बिहान” योजना का उद्देश्य और महत्त्व
“बिहान” योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं प्राकृतिक संसाधनों जैसे वृक्षारोपण, कृषि, पशुपालन आदि से जोड़कर स्थायी आजीविका का मार्ग प्रशस्त किया जाता है
सामाजिक सहभागिता, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है पौधरोपण और नर्सरी का कार्य इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पर्यावरणीय संरक्षण के साथ-साथ रोजगार का स्रोत भी बनता है।
समाज पर प्रभाव और आगे की राह
इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि क्या ग्राम स्तर पर महिला समूहों को पर्याप्त सहयोग मिल रहा है । जब महिलाएं अपनी मेहनत और आत्मबल से समाज के लिए कुछ करने का प्रयास करती हैं, तो प्रशासन, पंचायत और समुदाय की जिम्मेदारी है कि उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाए।
जनपद पंचायत की त्वरित कार्रवाई यह संकेत देती है कि शासन स्तर पर ऐसी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। यह न केवल शिकायतकर्ता समूह को न्याय दिलाने की दिशा में कदम है, बल्कि अन्य महिला समूहों के लिए एक सशक्त संदेश भी।

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