छत्तीसगढ़ शासन ने वर्ष 2025 के लिए स्थानांतरण नीति लागू कर दी है। 6 से 13 जून के बीच कर्मचारियों से स्वैच्छिक स्थानांतरण के आवेदन लिए गए, वहीं 14 जून से 25 जून तक स्थानांतरण आदेश जारी किए जा रहे हैं। इसके बाद 25 जून के पश्चात सामान्य स्थिति में कोई भी स्थानांतरण नहीं होगा। लेकिन इस निर्धारित प्रक्रिया के बीच कवर्धा जिले में तबादले को लेकर गतिविधियां तेज़ हो गई हैं।
दलाल सक्रिय, नेताओं के नाम पर झांसा
जिले की दोनों विधानसभा—कवर्धा और पंडरिया—राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। कवर्धा विधायक प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं जबकि पंडरिया विधायक भी प्रभावशाली और हाई प्रोफ़ाइल मानी जाती हैं। मगर स्थानांतरण नीति की इस प्रक्रिया में दोनों जनप्रतिनिधियों की रुचि नगण्य दिख रही है। इस स्थिति का लाभ उठाकर उनके करीबी होने का दावा करने वाले कथित दलाल सक्रिय हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, ये लोग कर्मचारियों को यह विश्वास दिला रहे हैं कि वे जनप्रतिनिधियों के नज़दीकी हैं और मनचाही पोस्टिंग करवा सकते हैं। कुछ स्थानों पर तो लेन-देन की बातें भी सामने आ रही हैं, जिससे स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
मैदानी इलाकों की होड़, जंगल छोड़ शहर की चाह
दूरस्थ जंगल क्षेत्रों में पदस्थ कई कर्मचारी कवर्धा मुख्यालय, पंडरिया नगर, या आसपास के सुविधाजनक स्थानों में स्थानांतरण के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। विभागीय कार्यालयों और प्रभावशाली नेताओं के संपर्क सूत्रों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। यह स्थिति कई महत्वपूर्ण शासकीय संस्थानों में कर्मचारियों की कमी की वजह बन सकती है।
नेताओं के दरवाजे खटखटाए जा रहे
राज्य स्तर पर भी अनेक कर्मचारी गृह ज़िले या मनचाही जगह पर पोस्टिंग के लिए मंत्री, विधायक, अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अनुशंसा पत्र लगवाने की कोशिशों में जुटे हैं। इससे न केवल प्रक्रिया के निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है बल्कि कुछ दलालों द्वारा नेताओं का नाम लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
नीति की प्रमुख बातें
6 से 13 जून: स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन।
14 से 25 जून: स्थानांतरण आदेश जारी करने की प्रक्रिया।
25 जून के बाद सामान्य स्थानांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध।
परस्पर सहमति से स्थानांतरण के लिए संयुक्त हस्ताक्षर अनिवार्य।
तृतीय श्रेणी: 10% तक, चतुर्थ श्रेणी: 15% तक स्थानांतरण सीमा।
परिवीक्षाधीन कर्मचारी इस प्रक्रिया से बाहर।
केवल ई-ऑफिस प्रणाली से आदेश निर्गत।
विशेष परिस्थिति में ही 25 जून के बाद स्थानांतरण संभव।
स्थानांतरण नीति को पारदर्शी और समयबद्ध रखने के प्रयासों के बावजूद ज़मीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। कवर्धा जिले में राजनीतिक नेतृत्व की निष्क्रियता और उनके नाम का अनुचित उपयोग करने वाले दलालों की सक्रियता से यह प्रक्रिया प्रभावित होती दिख रही है। शासन को चाहिए कि वह इस पर सतर्क निगरानी रखे और कर्मचारियों को भी ऐसे झांसे से सावधान रहने की आवश्यकता है।