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पंडरिया के डालामौहा पंचायत भवन के सामने पसरी गंदगी , विकास की उम्मीद बेईमानी

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कवर्धा , पंचायती राज का उद्देश्य जिलों, अंचलों और गांवों में स्थानीय स्वशासन का विकास करना है लेकिन पंडरिया जनपद पंचायत के वनांचल ग्राम पंचायत डालामौहा में स्वयं का भवन नही है। तो ग्राम विकास का चर्चा करने के लिए पंचायत पदाधिकारी कैसे एक स्थान पर इकठ्ठा होते होगे और सरकारी काम काज का संचालन किस स्थान से होता होगा । यह एक बड़ी चुनौती है। पंचायत का मुखिया अपने कार्यालय का मरम्मत नहीं करा सकता तो ग्राम पंचायत का विकाश कैसे होता होगा यह चिंतनीय है साथ ही सरकारी धन का सदुपयोग किस तरह से होता होगा यह एक गंभीर चिंतनीय है।
पंचायत भवन कबाड़ में तब्दील
पंचायती राज संस्थाओं का गठन 1993.94 में किया गया है और छत्तीस गढ़ राज्य का गठन 2000 में हुआ है । आज तक ग्राम पंचायत सक्षम नहीं हो पाया । वनांचल ग्राम पंचायत डालामौहा में स्वयं का भवन नही है। विद्यालय परिसर में जो भवन पहले बना हुआ था वो जर्जर हो गया । उसके बाद ठीक उसी के सामने एक सरकारी भवन है उसमे पंचायत कार्यालय का बैनर लगाकर कब्जा कर लिया है । उक्त भवन के चैनल गेट खराब , कमरा के बरामदा में असामाजिक तत्वों का डेरा साथ ही बैठने के लिए रखे स्टील की कुर्सी भी टूटा हुआ हालत में पड़ा हुआ है। भवन की हालत को देखने से ऐसा लगता है कि पंचायत पदाधिकारी उस भवन पर बैठना तो दूर झांकने भी नही जाते होंगे ।
पंचायत भवन के सामने गंदगी और घास
सरकार एक तरफ स्वच्छता अभियान शुरू किया है। गांवो को साफ सुथरा रखने की जिम्मेदारी और निगरानी का कार्य पंचायत पदाधिकारीयो को सौप कर रखे हुए है लेकिन जिस पंचायत में स्वयं का भवन नही है और जुगाड के भवन में कार्यालय संचालित किया जा रहा है। उसके सामने गाजर घास सहित अन्य गंदगी फैली हुई है। उनसे ग्राम विकास की उम्मीद करना बेईमानी है । जो स्वयं के कार्यालय को साफ सुथरा नही रख सकता वो पंचायत का क्या विकास कर पाएगा ।
विकास के नाम पर खानापूर्ति
ग्राम पंचायतों के विकास के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनेक प्रकार की योजनाएं संचालित किया जाता है। ग्राम विकास के लिए पंचायत को कार्य एजेंसी बनाया जाता है लेकिन उक्त पंचायत में छोटे बड़े सभी कार्य को पंचायत पदाधिकारियों ने ठेके पर देकर पूर्ण कराया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि मेन रोड के किनारे जो नाली बना हुआ है उसे भी ठेके पर देकर बनाया गया है। यहां पर सभी कार्य को ठेका दे दिया जाता है। कार्य में गुणवत्ता दिखाई नही देता केवल कमीशन खोरी में लोग मस्त रहते हैं।
जांच की आवश्यकता
ग्राम पंचायत डालामौहा में ग्राम विकास के लिए शासन से जितना भी राशि विभिन्न योजनाओं से प्राप्त हुआ है और पंचायत व्यय किया है उन सभी को समिति गठित कर सूक्ष्म जांच करने से तरह तरह की गड़बड़ियां उजागर होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।

 

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