ग्रामीणों से अपील: वर्षा ऋतु में वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु जंगल में चराई से करें परहेज
मानसून के साथ भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र में वन्यजीवों का प्रजनन काल शुरू हो गया है। इस संवेदनशील समय को ध्यान में रखते हुए कवर्धा वन विभाग ने अभ्यारण्य में मवेशियों की आवाजाही पर रोक लगाई है। पूर्व में चेतावनी और मुनादी के बावजूद हाल ही में कुछ गांवों—जैसे बेदरची व सरेखा—के ग्रामीण लगभग 200 मवेशियों को अभ्यारण्य में ले गए।
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शांतिपूर्वक संवाद करते हुए ग्रामीणों को स्थिति की गंभीरता समझाई, जिसके बाद उन्होंने सहमति से मवेशियों को बाहर ले जाया। विभाग ने उनके सकारात्मक रवैये की सराहना की है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सफारी जैसी गतिविधियाँ इन्हीं क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं। ऐसे में मवेशियों की आवाजाही न केवल वन्यजीवों के प्रजनन और आवास पर असर डाल सकती है, बल्कि संक्रामक रोगों और शिकार जैसी आशंकाओं को भी बढ़ा सकती है।
वन विभाग ने पुनः सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में मवेशी चराने से परहेज करें। आवश्यकता पड़ने पर भारतीय वन अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
संदेश स्पष्ट है:
आपका सहयोग ही वन्यजीवों की असली सुरक्षा है। आइए, मिलकर भोरमदेव अभ्यारण्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाएं।