लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना पंडरिया द्वारा पेराई सत्र 2024-25 (24 नवम्बर 2024 से 19 फरवरी 2025) में कुल 7,659 किसानों से 15,01,534.19 क्विंटल गन्ने की खरीदी की गई थी। इसके एवज में ₹47,31,33,740 का भुगतान किया जाना था, जिसमें से अब तक ₹38,74,16,865 का भुगतान किया जा चुका है। जबकि 2,018 किसान अब भी अपने ₹8,57,16,875 के भुगतान की राह देख रहे हैं, जिससे इन किसानों की खरीफ की फसल पर गहरा असर पड़ा है।
खरीफ का सीजन, जेब खाली
वर्तमान समय में खरीफ की बुआई का पीक समय चल रहा है, जो सामान्यतः जून से जुलाई के बीच होती है। ऐसे में गन्ना किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई व मजदूरी आदि के लिए नकदी की सख्त ज़रूरत होती है। लेकिन गन्ने का भुगतान न मिल पाने के कारण हजारों किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं।
किसानों की पीड़ा
“हमने नवंबर-दिसंबर में गन्ना दिया, फरवरी में पेराई बंद हो गई, लेकिन अब जुलाई खत्म होने को है, और अभी तक पैसा नहीं मिला। खेत खाली पड़ा है, बीज और खाद के लिए उधारी करनी पड़ रही है।”
158 दिन से लंबित है भुगतान
पेराई समाप्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है, लेकिन अब 5 महीने (158 दिन) बीत जाने के बावजूद हजारों किसानों को अभी तक भुगतान नहीं मिल पाया है। जबकि 26 जुलाई 2025 को 2,687 किसानों को ₹10.58 करोड़ का भुगतान किया गया, इससे पहले 6 जनवरी से 21 जनवरी के बीच भी आंशिक भुगतान हुआ था।
कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर
खरीफ की फसल में धान प्रमुख है, जिसके लिए किसानों को समय पर खेत तैयार कर बीज बोना होता है। लेकिन भुगतान में विलंब से ना केवल खेती प्रभावित हुई है, बल्कि कृषि उत्पादकता और आर्थिक स्थिरता पर भी गंभीर असर पड़ा है।
किसानों की मांग
किसान संगठनों ने राज्य शासन और चीनी मिल प्रबंधन से अपील की है कि लंबित भुगतान को तत्काल बैंक खातों में अंतरित किया जाए ताकि वे खरीफ की फसल की तैयारी कर सकें। साथ ही भविष्य में समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए नीति बनाई जाए।