कवर्धा स्थित शासकीय पीजी कॉलेज में सामने आए ₹1.22 करोड़ के गबन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रमोद कुमार वर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रमोद वर्मा कॉलेज में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत था।
वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर यह प्रकरण दर्ज किया गया था, जिसकी विस्तृत जांच के बाद गबन की राशि करीब ₹1.22 करोड़ तक पहुंच ।
कैसे हुआ खुलासा
महाविद्यालय संचालन में गड़बड़ी को लेकर मई 2024 में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शुरुआती जांच में करीब ₹28 लाख की हेराफेरी का पता चला। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में यह राशि बढ़कर ₹1,22,59,125 हो गई।
जांच में सामने आए ये गंभीर तथ्य:
₹1.13 करोड़ की राशि बैंक या खजाने में जमा नहीं की गई
₹24.81 लाख स्ववित्तीय मद में कम जमा किया गया
₹2.20 लाख बिजली बिल के नाम पर निकाले गए, लेकिन जमा नहीं किए गए
₹9.40 लाख की राशि मोबाइल बिल, ऑडिटोरियम किराया और अन्य मदों में गड़बड़ी से खर्च
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जानबूझकर छिपाए गए। कुछ कागज कॉलेज से बरामद हुए तो कुछ आरोपी के घर से मिले।
प्रमोद वर्मा ने यह स्वीकार किया कि कॉलेज से जुड़े कई मूल दस्तावेज उसके पास घर पर थे, जिन्हें बाद में लौटाया गया।
उसे पहले ही निलंबित कर दिया गया था, और अब दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।
पुलिस टीम ने इस मामले में गहराई से जांच की। टीम ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच की, पूछताछ की और सबूत जुटाए। आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही अब अन्य लोगों की भूमिका और बची हुई रकम की जांच जारी है।
कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थान में करोड़ों की हेराफेरी न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही दिखाती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है।
अब देखना यह है कि इस गबन में और कौन-कौन शामिल था और बाकी रकम की वसूली कैसे होगी।