राष्ट्रीय मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो, जिला कबीरधाम की अध्यक्ष मलाइका सिंह राजपूत ने एक जरूरतमंद परिवार की पीड़ा को न केवल सुना, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ बच्चों के भविष्य को संवारने का कार्य भी किया।
ग्राम सजनखार, तहसील कुकरदूर निवासी राम सिंह श्याम, जो अशिक्षित और अत्यंत गरीब हैं, ने ब्यूरो को आवेदन देकर अपनी व्यथा व्यक्त की। राम सिंह के तीन बच्चे हैं — दो पुत्र मनोज एवं सोनू और एक पुत्री सविता। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी पेट की गंभीर बीमारी से पीड़ित है और इलाज के लिए पैसे भी नहीं हैं। वह खुद भी निरक्षर हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए किसी प्रकार की मदद नहीं कर पा रहे थे।
राम सिंह ने बताया कि उन्होंने कई छात्रावासों के चक्कर काटे, लेकिन बच्चों को कहीं प्रवेश नहीं मिल पाया। पुत्री सविता पांचवीं पास करने के बाद छठवीं में प्रवेश की कोशिश कर रही थी, जबकि बेटा सोनू नशे की लत (बीड़ी व गुटखा) की ओर बढ़ रहा था। स्थानीय स्कूलों में शिक्षक नियमित नहीं आते, जिससे बच्चों की शिक्षा में बाधा आ रही थी।
इस मार्मिक परिस्थिति को समझते हुए मलाइका सिंह राजपूत ने बच्चों की जिम्मेदारी उठाई और तत्काल तीनों बच्चों की पढ़ाई व हॉस्टल का संपूर्ण खर्च वहन करने का निर्णय लिया। उन्होंने मनोज और सोनू का प्रवेश बैगा आदिवासी हॉस्टल, कवर्धा में करवाया, जबकि पुत्री सविता को प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास में स्थान दिलाया गया। साथ ही, सविता को कार्यपात्री शासकीय विद्यालय में भी एडमिशन दिलवाया गया।
मलाइका सिंह ने कहा, “यह केवल एक परिवार की मदद नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले वर्ग के लिए आशा की एक किरण है। हमारी टीम का उद्देश्य है कि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।”
यह पहल न केवल समाज सेवा का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो हर बच्चा शिक्षा का हकदार बन सकता है। राष्ट्रीय मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो की यह संवेदनशील कार्रवाई प्रशंसनीय है।