छत्तीसगढ़ का धान का कटोरा कहे जाने वाला बलौदा बाजार जिला इस बार भी धान के सबसे बड़े रकबे के साथ राज्य में पहले स्थान पर है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में इस खरीफ सीजन में लगभग 3.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बोनी-रोपाई पूरी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5,000 हेक्टेयर अधिक है। खेतों में हरियाली छा चुकी है, लेकिन अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाद की भीषण किल्लत है।
गांव-गांव से मिल रही शिकायतों के अनुसार, कई लाइसेंसी खाद विक्रेता यूरिया को निर्धारित मूल्य 266 रुपये प्रति बोरी से 500 से 700 रुपये अधिक यानी लगभग 750 से 1,000 रुपये प्रति बोरी में बेच रहे हैं। यह खुला उल्लंघन है आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और कृषि विपणन अधिनियम का। किसानों का कहना है कि इस समय फसल को टॉप ड्रेसिंग के लिए खाद की तत्काल जरूरत है, और मांग के चरम पर खाद की कालाबाज़ारी कर खुलेआम कानून तोड़ा जा रहा है, जबकि प्रशासन की कार्रवाई नाममात्र है।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार पिछले वर्ष जिले में रोपाई के बाद लगभग 1.8 लाख मीट्रिक टन खाद की खपत दर्ज हुई थी, वहीं इस बार शुरुआती अनुमान 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक का है। कृषि विभाग का दावा है कि सरकारी गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, मगर वास्तविकता यह है कि किसानों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रहा। दूसरी ओर, निजी दुकानों में ऊंचे दाम पर खाद आसानी से बिक रहा है।
जांच टीम गठित, लेकिन नतीजे नहीं
कृषि विभाग ने शिकायतों के बाद जिला और विकासखंड स्तर पर खाद आपूर्ति एवं विक्रय की निगरानी के लिए जांच टीम गठित की है। इन टीमों को दुकानों की आकस्मिक जांच, ऑनलाइन स्टॉक वेरिफिकेशन और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है और वास्तविक कार्रवाई तब तक संभव नहीं जब तक दोषियों के लाइसेंस निलंबित न हों और कालाबाज़ारी में पकड़े गए विक्रेताओं पर कठोर दंड न लगाया जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा असर धान की पैदावार और किसानों की आय दोनों पर पड़ेगा, और वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।