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संकुल केंद्र दुल्लापुर में 57,500 रुपये की वित्तीय अनियमितता का खुलासा — फर्जी भुगतान प्रकरण में संकुल समन्वयक निलंबित, संकुल प्राचार्य पर कार्रवाई की अनुशंसा

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जिला कबीरधाम के विकासखंड पंडरिया अंतर्गत संकुल केंद्र दुल्लापुर में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान संकुलगत व्यय में 57,500 रुपये की अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नवागांव टिकैत के शिक्षक सतीष कुमार तिवारी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में अनियमितताओं की पुष्टि के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
शिक्षक ने लगाए फर्जी भुगतान और गबन के आरोप
शिक्षक सतीष तिवारी ने बताया कि वे 19 नवंबर 2024 तक संकुल समन्वयक के रूप में कार्यरत थे। स्वास्थ्यगत कारणों से अवकाश पर जाने के बाद उनके स्थान पर प्रभारी संकुल समन्वयक के रूप में दिलीप सोनवानी को कार्यभार सौंपा गया।
उनका कहना है कि 1 अप्रैल से 20 नवम्बर 2024 तक कुल 80,000 रुपये प्राप्त हुए, जिसमें से 57,500 रुपये उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक व संकुलगत गतिविधियों — जैसे बैठकें, प्रशिक्षण, स्टेशनरी, फोटो कॉपी, रंगाई-पुताई आदि में व्यय किए।
लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत बिल और दस्तावेज़ों के बावजूद भुगतान रोक दिया गया। उल्टा उनके नाम पर अन्य व्यक्तियों को भुगतान दर्शाकर PPA जनरेट कर राशि आहरित कर ली गई।

जांच में आरोप सही पाए गए, प्रशासनिक कार्रवाई प्रारंभ
विकासखंड शिक्षा अधिकारी पंडरिया की अनुशंसा पर गठित जांच दल ने शिकायत की जांच की, जिसमें भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता और फर्जीवाड़ा पाए जाने की पुष्टि हुई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी संकुल समन्वयक ए. सोनवानी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं संकुल प्राचार्य गोविंद प्रसाद तिवारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए संचालक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर को पत्र भेजा गया है।
बीमार शिक्षक की न्याय लड़ाई बनी मिसाल
शिकायतकर्ता सतीष तिवारी इस समय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि लम्बे समय से लंबित भुगतान और उत्पीड़न के कारण उनका इलाज भी प्रभावित हुआ।
फिर भी उन्होंने निरंतर प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें कीं और साक्ष्यों के साथ मामला उठाया — जिसका परिणाम अब सामने है।
उन्होंने अब भी मांग की है कि
उनके द्वारा प्रस्तुत ₹57,500 के वैध बिलों का भुगतान PFMS माध्यम से संबंधित दुकानदारों को शीघ्र किया जाए।
दोषी अधिकारियों के विरुद्ध पूर्ण दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां न हों।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल
यह प्रकरण शिक्षा विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी का एक उदाहरण बन गया है। शिक्षक संगठन इसे “नैतिक विजय” बता रहे हैं कि एक कैंसर पीड़ित शिक्षक के संघर्ष से आखिरकार फर्जी भुगतान करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की नौबत आई।
अब देखना यह होगा कि संचालक लोक शिक्षण रायपुर और जिला प्रशासन कबीरधाम दोषियों के विरुद्ध अंतिम कार्रवाई कितनी शीघ्रता से करता है और पीड़ित शिक्षक को उसका वैध भुगतान दिलाता है।

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