पंडरिया विकासखंड के खैरझीटी नया धान उपार्जन केंद्र में धान खरीदी को लेकर जो आशंका थी, वह अब सामने आ गया ।किसानों से 41 किलो प्रति बोरी से अधिक की धान खरीदी का वीडियो पहले वायरल हो चुका था , लेकिन भौतिक सत्यापन और स्टॉक मिलान के बाद सामने आया कि स्ट्रोक में मौजूद कई बोरियों में निर्धारित 35 किलो से भी कम मात्रा दर्ज पाई गई।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार 31/03/2026 को तैयार पंचनामा में स्टॉक और वास्तविक भंडारण के बीच भारी अंतर दर्ज हुआ। मौजूद लोगों के अनुसार कुल ₹25,87,920 मूल्य की धान की कमी पाई गई है। यानी खरीदी, तौल और भंडारण की पूरी प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
वायरल वीडियो से भौतिक सत्यापन तक
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने धान खरीदी के समय सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में किसानों से 41 किलो प्रति बोरी से अधिक मात्रा में धान लिए जाने का आरोप लगाया था। किसानों का कहना था कि अतिरिक्त वजन के नाम पर ज्यादा धान लिया जा रहा है। लेकिन जब भौतिक सत्यापन हुआ तो कई बोरियों में 35 किलो की निर्धारित मात्रा भी पूरी नहीं मिली।
यह अंतर केवल तौल त्रुटि नहीं माना जा सकता, क्योंकि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में लाखों रुपये का फर्क दर्ज हुआ है।
स्टॉक रजिस्टर और भौतिक उपलब्धता में स्पष्ट अंतर
कई बोरियों में मानक से कम वजन
कुल ₹25,87,920 मूल्य की धान की कमी
जिम्मेदारी तय कौन करेगा
यदि किसानों से 41 किलो प्रति बोरी से भी अधिक मात्रा में धान लिया गया, तो स्ट्रोक में 35 किलो से भी कम क्यों मिला।
तौल मशीनों की निगरानी किसके पास थी।
भंडारण और परिवहन की जिम्मेदारी किस अधिकारी के अधीन थी।
धान खरीदी व्यवस्था राज्य की सबसे बड़ी आर्थिक प्रक्रियाओं में से एक है।
ऐसे में लाखों की धान का गायब होना केवल एक केंद्र की चूक नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिह्न है।
कार्रवाई या खानापूर्ति
अब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से ठोस जवाब सामने नहीं आया है। पंचनामा के आधार पर जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन जब तक जिम्मेदारों पर स्पष्ट दंडात्मक कदम नहीं उठते, तब तक यह मामला किसानों के भरोसे और सरकारी व्यवस्था—दोनों पर गहरी चोट बनकर रहेगा।