जिले के बोडला विकासखण्ड से धवाईपानी तक का मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है, जो आगे मध्यप्रदेश सीमा में प्रवेश करता है। यह मार्ग न केवल दो राज्यों को जोड़ता है, बल्कि अब अवैध कब्जे, शराबखोरी और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गया है।
जानकारी के अनुसार, बोडला से धवाईपानी तक के बीच सड़क किनारे दर्जनों होटल और ढाबे सरकारी व वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं। बिना किसी वैध स्वीकृति या पट्टे के बनाए गए ये ढाबे खुलेआम ग्राहकों को छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश, दोनों राज्यों की शराब बेची और पिलाई जा रहे हैं।
यहां आने-जाने वाले वाहनों के चालक, पर्यटक और स्थानीय लोग इन ढाबों से खरीद कर शराब सेवन करते हैं, जिससे कई बार सड़क हादसों की स्थिति भी बनती है। सूत्रों के अनुसार, शराब तस्करी और अवैध बिक्री पर नियंत्रण के लिए ना तो आबकारी विभाग सक्रिय है और ना ही पुलिस या वन विभाग की कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और दो राज्यों की शराब बिक्री एक गंभीर अपराध है, जो कानून व्यवस्था और राजस्व दोनों के लिए चुनौती है।
लोगों ने राज्य सरकार, वन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मांग की है कि बोडला से धवाई पानी तक पूरे क्षेत्र का सर्वे कर अवैध ढाबों, शराब बिक्री और कब्जों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।