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कवर्धा मेडिकल फर्जीवाड़ा केस में नई हलचल — निलंबित लिपिक दीपक सिंह ठाकुर पर विभागीय जांच का रास्ता साफ

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कबीरधाम जिले के बहुचर्चित मेडिकल फिटनेस फर्जीवाड़ा मामले में निलंबित लिपिक दीपक सिंह ठाकुर पर विभागीय जांच का मार्ग अब पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा याचिका वापस लिए जाने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग उनके विरुद्ध लंबित विभागीय जांच पुनः प्रारंभ करने की तैयारी में है।
निलंबन से लेकर कोर्ट आदेश तक पूरी कार्रवाई का क्रम —
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 03 जनवरी 2025 को लिपिक दीपक सिंह ठाकुर को निलंबित किया गया था। इसके बाद 21 जनवरी 2025 को उन पर आरोप पत्र जारी करते हुए 17 मार्च 2025 को विभागीय जांच संस्थित की गई थी।
दीपक सिंह ठाकुर ने अपने निलंबन और जांच प्रक्रिया को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका (WPS No. 975/2025) दायर की थी।
माननीय न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने 24 मार्च 2025 को प्रारंभिक सुनवाई में विभागीय जांच पर रोक लगा दी थी। इसके अनुपालन में 03 अप्रैल 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कवर्धा ने विभागीय जांच प्रक्रिया स्थगित कर दी थी।
हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा 30 अक्टूबर 2025 को आवेदन प्रस्तुत कर स्वेच्छा से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई, जिस पर 04 नवंबर 2025 को माननीय न्यायालय ने आदेश पारित करते हुए याचिका को “withdrawn with liberty” कर दिया — यानी अब विभाग को जांच आगे बढ़ाने की पूरी छूट मिल गई है।
अब विभागीय जांच फिर से शुरू होगी
हाईकोर्ट से याचिका वापस होने के बाद स्वास्थ्य विभाग अब दीपक सिंह ठाकुर के खिलाफ विभागीय जांच फिर से प्रारंभ करेगा। विभागीय जांच में नेत्र सहायक अधिकारी मनीष जॉय, नव आरक्षक डेविड लहरे और खेमराज के बयान को निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि आरोप है कि मनीष जॉय के फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग कर डेविड लहरे और खेमराज को मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए गए।
पूरे प्रकरण में साख पर लगी दांव
इस मामले में न केवल विभागीय अनुशासन बल्कि मेडिकल प्रमाणन प्रक्रिया की साख भी दांव पर है। सूत्रों के अनुसार, विभागीय जांच समिति जल्द ही आरोपी लिपिक दीपक सिंह ठाकुर, शिकायतकर्ता मनीष जॉय और संबंधित पुलिसकर्मियों को बयान के लिए नोटिस भेज सकती है।
अब निगाहें जांच समिति पर
अब यह देखना होगा कि जांच समिति कितनी शीघ्रता से प्रक्रिया आरंभ करती है और क्या विभाग इस फर्जीवाड़े के सभी पहलुओं का खुलासा कर पाएगा।
फिलहाल इतना तय है कि कवर्धा मेडिकल फर्जीवाड़ा केस एक बार फिर प्रशासनिक और न्यायिक हलचल का केंद्र बन गया है।

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