कवर्धा। कबीरधाम जिले के ग्राम घूघरी खुर्द में चल रही शिव महापुराण कथा ने आस्था का ऐसा अद्भुत वातावरण निर्मित किया है, जिसने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया है। प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही यह पवित्र कथा 6 नवंबर से प्रारंभ होकर 10 नवंबर तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होकर भक्ति रस में सराबोर हो रहे हैं।
पहले ही दिन से कथा स्थल पर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही भक्त “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ पंडाल पहुंच रहे हैं। शिव भक्ति के भजनों, ध्यान और सत्संग से घूघरी खुर्द का वातावरण मानो काशी की पवित्र गंगा घाट में परिवर्तित हो गया हो।
71 पीढ़ियों का उद्धार और शिव स्मरण का संदेश
अपने प्रवचन में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा— “भगवान शिव का स्मरण मात्र करने से मनुष्य ही नहीं, उसकी 71 पीढ़ियों तक का उद्धार होता है।” उन्होंने जीवन में संयम, विश्वास और नियमित जलाभिषेक को हर संकट के समाधान की कुंजी बताया।
महाराज ने बेलपत्र के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि “शिव को अर्पित प्रत्येक बेलपत्र जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।”
भक्तों के अनुभव बने भक्ति की प्रेरणा
कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं के पत्रों ने वातावरण को भावुक बना दिया।
कवर्धा की एक महिला ने लिखा कि 10 वर्षों तक संतान सुख से वंचित रहने के बाद जब उन्होंने प्रदीप मिश्रा की कथा सुनी और नियमित शिव आराधना की, तो शिव कृपा से उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ।
वहीं गेंदपुर की एक महिला ने बताया कि गंभीर बीमारी के समय बेलपत्र अर्पण और शिव मंत्र जपने से उनका स्वास्थ्य चमत्कारिक रूप से सुधर गया।
सुव्यवस्थित आयोजन, भक्तों की बढ़ती भीड़
आयोजक समिति और जिला प्रशासन ने कथा स्थल पर जल, भोजन, पार्किंग व सुरक्षा की उत्कृष्ट व्यवस्था की है। पुलिस विभाग की सक्रियता से यातायात और भीड़ नियंत्रण भी सुचारू रूप से संचालित है।
भक्ति के इस महापर्व में ग्रामीण, शहरी, युवा और वरिष्ठ—सभी एक ही भाव से शिव नाम में लीन हैं।
आस्था का राष्ट्रीय उत्सव बनता आयोजन
प्रदीप मिश्रा के प्रवचन में केवल भक्ति नहीं, बल्कि जीवन दर्शन और सामाजिक संदेश का अनूठा संगम भी है। उन्होंने कहा— “शिव भक्ति केवल पूजा का माध्यम नहीं, बल्कि नैतिकता, धैर्य और शांति का मार्ग है।”
घूघरी खुर्द जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इतना विराट और अनुशासित आयोजन न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश में आस्था और सामाजिक समरसता का उदाहरण बन गया है।
कथा 10 नवंबर तक प्रतिदिन आयोजित होगी, और शिव नाम की गूंज अब इस छोटे से गांव को राष्ट्रीय आध्यात्मिक मानचित्र पर स्थापित कर रही है।