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बिलासपुर में जमीन घोटाले की फाइल ‘गायब’, 4 माह से SDO का अभिमत लंबित—अपराधियों को संरक्षण

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बिलासपुर जिले में भूमि गबन और फर्जीवाड़े से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम लिंगयाडीह निवासी दुखहरण ढीमर द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संयुक्त कलेक्टर के स्पष्ट पत्र के बावजूद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) बिलासपुर पिछले चार माह से अपना अभिमत नहीं दे रहे हैं, जबकि पूरा जांच प्रतिवेदन पहले ही तैयार हो चुका है।
मामले के अनुसार 25 अक्टूबर 2024 को शिकायतकर्ताओं महेत्तर ढीमर और दुखहरण ढीमर ने अपनी स्वत्वाधीन भूमि खसरा नंबर 103/5, 103/8 और 103/10 में गबन व फर्जीवाड़े को लेकर संभागायुक्त बिलासपुर को लिखित शिकायत दी थी। इस पर संभागायुक्त ने 29 अक्टूबर 2024 को कलेक्टर बिलासपुर को नियम अनुसार जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर द्वारा यह प्रकरण 13 नवंबर 2024 को एसडीओ बिलासपुर को भेजा गया, जिसे 19 नवंबर 2024 को कार्यालय द्वारा प्राप्त किया गया।
एसडीओ के निर्देश पर जांच शुरू हुई। हल्का पटवारी से 30 मई 2025 को जांच प्रतिवेदन लिया गया। इसके बाद नायाब तहसीलदार विभोर यादव ने जांच पूर्ण कर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किए जाने की स्पष्ट अनुशंसा करते हुए 19 जुलाई 2025 को प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय भेज दिया।
इसके बावजूद संयुक्त कलेक्टर कार्यालय से अभिमत हेतु भेजी गई फाइल (डॉक क्रमांक 3112, प्राप्ति दिनांक 09 जुलाई 2025) पिछले चार माह से एसडीओ कार्यालय में लंबित है। हैरानी की बात यह है कि अब संबंधित पत्र को “गुम” बताया जा रहा है, जबकि उसकी कोई आंतरिक जांच तक नहीं कराई गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस देरी और फाइल गुम होने की कहानी से भूमि माफिया और आरोपी पक्ष के हौसले बुलंद हो रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय न होने से कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़ित ने माननीय जिलाधीश से मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, फाइल गुम होने की जांच कराई जाए और जांच प्रतिवेदन के आधार पर दोषियों के विरुद्ध तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जाए।
अब सवाल यह है कि—
जब जांच पूरी, दोषियों की पहचान और एफआईआर की अनुशंसा हो चुकी है, तो फिर चार माह से कार्रवाई क्यों अटकी है ।
फाइल गुम होने के लिए कौन जिम्मेदार है—और किसे संरक्षण दिया जा रहा है ।

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