जनपद पंचायत पलारी कार्यालय के समीप से योगी ब्रिक्स–सिद्धेश्वर मंदिर मार्ग की ओर नगर पंचायत पलारी द्वारा ग्रीष्मकाल (मई–जून) में कराए गए नाली निर्माण की पोल पहली ही बरसात में खुल गई। निर्माण की गुणवत्ता इतनी घटिया रही कि नाली में जगह-जगह दरारें पड़ गईं और पुलिया के समीप बरसात में पानी का दबाव बढ़ते ही नाली पूरी तरह टूट गई।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्य गलत प्राक्कलन, तकनीकी मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के उपयोग का नतीजा है। नाली निर्माण के दौरान न तो बरसाती जल प्रवाह का आकलन किया गया और न ही पुलिया के पास अतिरिक्त दबाव को ध्यान में रखा गया, जिससे कुछ ही महीनों में निर्माण ध्वस्त हो गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अब उसी स्थान पर नगर पंचायत द्वारा नाली की चौड़ाई बढ़ाकर पुनः निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन सीमेंट-गिट्टी-रेत के मिश्रण में नाली के गंदे पानी का उपयोग किया जा रहा है। कार्यस्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि इस तरह का निर्माण भविष्य में और भी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।
इतना ही नहीं, निर्माण कार्य में ठेका किसी और के नाम पर स्वीकृत है, जबकि मौके पर काम किसी अन्य व्यक्ति से 800 रुपये प्रति मीटर की दर पर कराया जा रहा है। यह स्थिति ठेका हस्तांतरण, मध्यस्थ व्यवस्था और संभावित कमीशनखोरी की ओर साफ इशारा करती है।


